मुड ताजा करने के लिए

Posted On 14:51


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तकलीफ

Posted On 00:47


मैंने भी अभी तक कई सेक्स कहानी पढ़ी और सोचा की क्यूँ न मैं भी अपना एक्ष्पेरिएन्के शेयर करूँ.... बात की शुरुआत करने से पहले मैं कुछ अपने बारे में बताना चाहता हूँ॥ में nagpur me rehta hoon aur ek होमोपेथिक डॉ। हूँ... लगभग ४ महीने पहले की बात है एक आंटी(आगे ३८) मेरे क्लिनिक में आयीं और अपनी कोम्प्लैंत सुनाने लगीं,तरह की कोम्प्लैंत सुनने के बाद मैंने उन्हें दवाई दी और एक हफ्ते बाद आने को कहा और मेरा मोबाइल नो. उन्हें दे दिया..दुसरे ही दिन उनका फ़ोन आया की दवाई लेने से उनकी प्रॉब्लम और बढ़ गयी है,और एक अजीब प्रॉब्लम हो रही है की उन्हें सेक्स की इच्छा बहुत होने लगी है मैंने अगले दिन उन्हें क्लिनिक में बुलाया कुछ उनके घर के और फॅमिली के बारे में पूछा तो पता चला की वो अपनी छोटी बेटी के साथ रहती हैं और १ साल पहले ही उनके हुसबंद की देअथ हुयी है..

उसके बाद से उन्हें घबराहट,बेचैनी,डर,वहम,नींद न आने और बात बात में अपने हुसबंद की याद में रोने लगने की इच्छा होती है...आगे और हिस्टरी लेने पर पता चला की उनकी सेक्सुअल लाइफ भी बहुत अच्छी थी और हुसबंद की देअथ के बाद अकेलापन महसूस करने लगी थी..मैंने फीर से उन्हें कुछ दवैयाँ दी और वो कुव्ह्ह उदासी सा चेहरा लीये मेरे क्लिनिक से चली गयी,और मैं अपने मरीजों को देखने में व्यस्त हो गया.....

३ दिन बाद दोपहर के एक बजे रोटी हुयी आवाज़ में उनका फ़ोन आया और कहने लगीं की उनकी तकलीफ अचानक बढ़ गयी है और वो इस लायक भी नहीं के वो मुझे दिखने आ सकेएं..तो उन्होंने मुझे घर आके चेक-उप करने को कहा.मैंने भी उनकी रोई आवाज़ को सुन आने के लीये हाँ कह दिया,क्युंकी उनका घर मेरे ही शहर में था और कोई जादा दूर भी नहीं..मैं उनके घर पहुंचा बेल बजाई मैड ने दरवाज़ा खोली मैं अंदर चला गया अतिएन्त के बारे में पूछा तो पता चला की वो अपने बेडरूम में हैं,कहकर मैड ने मुझे बेडरूम की और इशारा किया और खुद घर से चली गयी.

अब इस घर में मैं और मेरा अतिएन्त थे..मुझे बेडरूम में घुसते देख उन्होंने जोर जोर से रोना शुरू कर दिया,मैंने हाल चाल पूछ तो उन्होंने रोते हुए अपनी कमर की और इशारा किया की इसमें बहुत दर्द है..मैंने जैसव ही कमर चेक करने अपना हाथ बढाया तो उनकी सिसकी बढ़ने लगी और वो लम्बी सासे लेने लगी और कहा की सीने में अजीब एथान और दर्द हो रहा है,मैंने जैसे ही अपना स्टेथो उनके सीने में रखा वो प्यासी नागिन की तरह अपनी ज़बान चाटने लगी और मेरा हाथ पकड़ कर बोली के तुम्हे डॉ किसने बना दिया जो मरीज़ की बीमारी नहीं पहचान सकते..मैंने उनका बप चेक करने की कोशिश की तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ अपनी और खीच कर कहा की डॉ साहेब बप नहीं बल्कि अपनी छूट की तरफ इशारा कर कहा की यहाँ का प्रेस्सुरे चेक करो.तब मैं समझा की मेरे इस मरीज़ को कौन से बीमारी है..

फीर मैंने कहा की कोई बात नहीं अब उन्हें घबराने की ज़रुरत नहीं और मैं उनकी पीठ सहलाने लगा वो गरम होने लगीं और अपनी बूब्स को मेरी और करने लगीं मैंने भी उनके बूब्स देखे और उसे मसलने लगा उनकी सिसकी बढ़ने लगी मैंने अपने हाथों को ब्लौसे के अंदर किया और उन्होंने ब्लौसे और ब्रा दोनों खोल अपनों सदी उतार दी अब वो सिर्फ अपनी चड्डी में थी मैंने भी अपने कपडे उतारे और उनके ऊपर चढ़ गया थोड़ी देर बूब्स को दबा इसे चूसा और फीर अपनी मंजिल यानि छूट की और देकः वाकई में क्या छूट थी जैसे विरगिन की मैंने उसकी लिच्किंग सुरु कर दी और आंटी की बेचैनी बढ़ने लगी और फीर मैंने वो काम शुरू किया जिसका वो इंतज़ार कर रहीं थी,मैंने अपने ९इन्च लैंड को उनकी गीली छूट में डाला जो थोड़ी सी हरकत के बाद सीधे अंदर गुसा जिससे अतिएन्त चीख से आआआआअह्ह्ह्ह्ह्ह् निकला मैंने लगभग २५ मिनुत तक उन्हें छोड़ा वो पूरी तरह से संतुष्ट हुयीं और फीर मैं वहां से चल निकला....और जब कभी भी उनका फ़ोन आता है या मेरी इच्छा होती है तो हम भरपूर चुदाई करते


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औरत होने के नाते

Posted On 00:42

एक औरत होने के नाते मेरी चूत तो गीली हो जाती है, पढ़ते-पढ़ते हाथ नाड़ा खोल
कच्छी में चला जाता है, फिर दिल करता है कि रात को पतिदेव जल्दी घर आयें और
मुझे चोदें। पर मेरे पति का लंड बहुत छोटा है सिर्फ 6 इंच का ! न ज्यादा मोटा
है न ही वो ज्यादा वक़्त चोद पाते हैं। सौ बात की एक बात बात यह है कि मैं
अपने पति से खुश नहीं हूँ, आजकल नया लंड ढूंढ रही हूँ। शादी को आज चार महीने
हो चुके हैं।


खैर ऊपर तो मैंने शोर्टकट में अपनी जिंदगी की कुछ बातें लिखीं हैं, मैं 24
साल की औरत हूँ, चार महीने की शादीशुदा हूँ, चूत बहुत प्यासी है क्यूंकि शादी
से पहले कई लंड थे, अब सिर्फ एक है। शुरू से ही मैं एक चालू लड़की के तौर से
जानी जाती थी। अट्ठारह साल की उम्र में पहला लंड मेरी चूत में उतरा था।

मेरे चाचा के बेटे की शादी थी, पंजाब में शादी कई दिन पहले से शुरु हो जाती
है। सर्दियों के दिन थे। उसके काफी दोस्त आये हुए थे, जिनके लिए भाई ने अलग
इंतजाम किया था। वहीं दारु, खाना-पीना सब कुछ !मैंने जवानी में नया-नया पैर
रखा था, मेरा दाना कूदने लगा था। ऊपर से मेरी कंपनी भी अच्छी नहीं थी। अपने
से बड़ी लड़कियों से मेरी दोस्ती थी जिनके दो दो बॉयफ्रेंड थे और चुदवाती भी
थीं। वो भी रोज़ शाम को हमारे घर ही आ जाती थी। भाई के कई दोस्त हम तीनों पर
लाइन मारते थे।

एक पिंटू नाम के लड़के ने मुझे प्रपोज़ कर दिया। मैंने कोई जवाब नहीं दिया,
बस मुस्कुरा दी। वो समझ गया !

ऐसे ही वो दोनों सहेलियाँ तो महान थीं, जहाँ दोस्त ठहरे हुए थे, वहीं पहुँच
गईं। पता नहीं कितनों से चुदवाया होगा।

शगुन की रात से एक रात पहले सभी नाच रहे थे, लड़के अलग, लड़कियाँ अलग !
नाचते-नाचते बहुत थक गई, पसीने से कुर्ती भीग गई। पिंटू की नज़र मेरे मम्मों
पे थी, उसका ध्यान मुझ पर ही था। मैं पानी पीने के लिए नीचे गई, पिंटू मेरे
पीछे आ गया। सभी ऊपर थे, उसने मेरी बांह पकड़ ली और मुझे अपने सीने से लगा
लिया। मैं पहली बार किसी लड़के के इतना करीब आई थी। मुझे कुछ कुछ होने लगा,
शर्म से मुखड़ा लाल हो गया। उसने मेरे गुलाबी होंठों को चूम लिया, एक हाथ
मेरी कुर्ती में डाल मेरे मम्मे दबा दिए।छोड़ो ! कोई आ जाएगा !

उसने थोड़ी पी रखी थी, बोला- चलो, दूसरे घर चलतें हैं। सभी मस्त हैं ऊपर !
किसी को ध्यान नहीं है !

प्लीज़ छोड़ो !

उसने मुझे उठाया और स्टोर रूम में ले गया, कुण्डी लगा दी और पास में पड़ी
रजाई पर डाल मुझ पर सवार हो गया। मेरी कुर्ती उतार दी, लाचा खोल दिया, मेरे
मम्मे चूसने लगा। मैं पहली बार किसी लड़के के नीचे नंगी हुई थी।

उसने अपना लंड निकाला और मेरे हाथ में दे दिया- सहलाओ इसको !

प्लीज़ छोड़ दो ! यह गलत है !

कुछ गलत नहीं है !

बाहर अचानक कोई चीज़ गिरी तो हम अलग हुए। मैंने कुर्ती डाली, लाचा बांधा।

उसने मुझे कसम दे दी कि उस घर में जा रहा हूँ, वहाँ कोई नहीं है, तुझे आना
होगा !

पहले वो धीरे से निकला, फिर मैं !

मैंने ऊपर जाकर सब अपनी सहेलियों को बताया। उन्होंने मुझे कहा- तुझे जाना
चाहिए! वो नाराज़ हो जाएगा! हम यहाँ देख लेंगी, कोई बात हुई तो संभाल लेंगी।

मैं चुपके से उस घर चली गई जहाँ भाई ने सिर्फ दोस्तों के रुकने का इंतजाम
किया हुआ था। जाते ही उसने मुझे बाँहों में कस लिया, बिस्तर पर उसने मुझे
नंगी कर दिया। सिर्फ पैंटी रह गई।

उसने एक-दो पेग और लगा लिए थे। उसने मेरे निपल चूसने शुरु किये, वो मेरे
विकसित हो रहे अनारों का रस पीने लगा। उसने अपना लंड निकाल कर मुझे पकड़ा
दिया, मेरा सर पकड़ अपने लंड की ओर दबाया और अपने लंड को मेरे मुँह में डाल
दिया।

मैं थोड़ा हैरान हुई !

उसने कहा- सेक्स में यह सब करना पड़ता है ! तेरा पति भी करवाया करेगा !

मुझे उसका चूसना अच्छा लगने लगा। उसने 69 में लाकर मेरी चूत पर होंठ रख दिए
और मैं पागल हो गई। मैं जोर जोर से उसके लंड को चूसने लगी। मेरा दिमाग घूम
गया। उसकी जुबान मेरी चूत में हरक़त करती तो मैं पगला जाती !

उसने मेरी दोनों टाँगे चौड़ी करवा ली और अपना लंड मेरी चूत पर टिकाते हुए
रगड़ा तो मस्ती से मेरी आंखें बंद हो गई। लेकिन जैसे ही उसने झटका मारा, मानो
मेरे गले में हड्डी फंस गई हो !

न चीख पा रही थी। क्यूंकि दोनों होंठ उसने अपने होंठों में ले रखे थे। आँखों
से आंसू निकल आये लेकिन बेदर्दी ने अपना लंड जड़ तक पहुँचा कर छोड़ा ! खून से
सफ़ेद चादर पर दाग पड़ चुके थे। जब उसके लंड ने घिसना छुरु किया तब जाकर मुझे
राहत मिली। फिर तो मानो मुझे स्वर्ग दिखने लगा। जब उसको लगा कि मैं सेट हो
चुकी हूँ तो उसने मुझे ढीला छोड़ दिया।

मैंने उसकी पीठ पर नाख़ून गाड़ दिए और और गाण्ड उठा-उठा कर चुदवाने लगी। उसने
भी पूरे दम से मुझे चोदा।

जैसे ही मेरा पानी निकला, उसके लंड ने भी अपना पानी छोड़ दिया और दो रसों का
मिलन हो गया। उसने अपना लण्ड मेरी चूत में से निकाल मेरे मुँह में घुसा दिया।
मैंने उसे चाट कर साफ़ किया और वो फ़िर मेरे अंगों से खेलने लगा। उसने पास
पड़ी बोतल से पेग बनायाम आधा मुझे पिला दिया। इतना ही काफी था मुझे घुमाने के
लिए !

मैं भी उसके लंड से खेलने लगी, लण्ड दोबारा खड़ा होने लगा तो मैंने चूस कर
उसको पूरा खड़ा कर दिया। उसने मुझे अपने लंड पर बैठने को कहा तो मैंने हाथ
नीचे ले जाकर ठिकाने पर सेट किया और उसको अपने अन्दर ले लिया। थोड़ी तकलीफ के
बाद पूरा घुस गया। रात के तीन बज़े तक उधर संगीत चला, इधर चुदाई !

इतने में उसने मुझे तीन बार चोदा, पहली चुदाई में ही तीन बार चुदी।

उसने मुझे अगली रात फिर से आने का वादा लिया। अगली रात चली तो गई लेकिन
अँधेरा होने की वजह से किसी और की बाँहों में जा बैठी ! या सोचा समझा धोखा था
? जो भी था, रहस्य है, दो के साथ ?????????? बहुत आया ! क्या बहुत आया ?

जानने के लिए अगली कड़ी ज़रूर पढ़ना !


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स्कूल ड्रेस

Posted On 00:41

मेरा नाम रवि है, मैं आपको अपनी एक कहानी बताता हूँ।

जब मैं स्कूल में पढ़ता था तब मेरे साथ मेरी एक दोस्त थी जिसका नाम ऋतु था वो
मेरे घर क पास ही रहती और हम एक साथ स्कूल जाया करते थे। एक बार किसी कारण से
मुझे स्कूल जाने में देर हो गई तो ऋतु मेरा इन्तज़ार करते करते मेरे घर आ गई।
उस दिन बारिश हो रही थी, वो भीगती हुई आई। उसकी स्कूल ड्रेस भीग चुकी थी उसे
देख कर मेरी मम्मी ने कहा- थोड़ी देर रुको, रवि नहा कर आ रहा है, फिर तुम
दोनों उसके पापा की कार लेकर स्कूल चले जाना। लेकिन उससे पहले अपने घर जाकर
अपने कपड़े बदल लेना।

तो वह मान गई। जब मैं नहा कर आया तो देखा कि वो दरवाजे पर खड़ी मम्मी से बात
कर रही थी। उसकी शर्ट एक दम गीली थी उसके स्तन और चुचूक एकदम मस्त लग रहे थे।

मैं पास गया तो देख कर हैरान हो गया। चूचियाँ देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया
था। वो भांप गई कि मेरी नज़रें उसके वक्ष पर हैं लेकिन वह कुछ नहीं बोली। फिर
मैं जल्दी से तैयार होकर आया तो पापा से कार की चाबी लेकर कार स्टार्ट करने
लगा और होर्न बजा कर ऋतु को बुलाने लगा। ॠतु होर्न सुन कर जल्दी से मेरे पास
आई और बोली- रवि, तू आज मरवा देगा बक्शी मैडम से !

मैंने कहा- तू जल्दी से गाड़ी में बैठ ! पहले तेरे घर चलें, तू ड्रेस बदल,
फिर स्कूल जायेंगे।

वो बोली- नहीं, हम लेट हो रहे हैं, मैं घर नहीं जाउंगी, सीधे स्कूल चलते हैं।

और वो कार में बैठ गई। उसका स्कूल बैग उसकी पीठ पर था तो वह ठीक से बैठ नहीं
पा रही थी।

मैंने कहा- ऋतु, अपना बैग उतार कर पीछे सीट पर रख दे !

तो वह बैग उतारने लगी। जब वह बैग उतार रही थी तो उसके कंधे पीछे की ओर हो गए
और स्तन बाहर की ओर आ गए। उसके चुचूक एकदम कड़क थे पानी में भीगने की वजह से !

मेरा मन कर रहा था कि बस स्कूल न जाकर उसे घर ले जाकर चोद दूँ।

तभी उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और बोली- क्या देख रहे हो ?

मैंने कहा- कुछ नहीं, बस ऐसे ही !

उसने कहा- तुम मेरी चूचियाँ देख रहे हो ना ?

गलती से मेरे मुँह से हाँ निकल गया और वो बोली- कितने गंदे हो तुम रवि ! मुझे
इतनी गन्दी नज़रों से देखते हो !

मैंने कहा- इसमें गुस्सा होने की क्या बात है? यह चीज़ ही ऐसी है कि किसी की
नज़र ना पड़े तो वह अँधा है !

यह बात सुन कर वह मुँह दूसरी तरफ करके बैठ गई। मैं तो बस उसके वक्ष के बारे
में ही सोच रहा था। थोड़ी देर में हम स्कूल पहुँच गए। मैं अपना बैग लेने के
लिए पीछे मुड़ा, इतने में वो भी मुड़ी, उसके होंठ मेरे गालों से छू गए। फिर
मेरे अन्दर एक करंट सा लग गया और उसे बोला- एक और प्लीज़ ! एक और !

वो बोली- तो बहाना चाहिए बस?

मैंने कहा- तू चीज़ ही इतनी मस्त है ! मैं क्या करूँ !

तो वह हँस पड़ी और हम दोनों बैग उठा कर स्कूल जाने लगे। स्कूल की सीढ़ी चढ़ते
वक़्त मैंने देखा कि उसके स्तन ऊपर-नीचे उछल रहे हैं। मेरा तो लंड खड़ा हो
रहा था देख-देख कर !

ना जाने कैसे उसकी शर्ट का बटन खुल गया था, अंदर से उसकी सफ़ेद रंग की ब्रा
चमक रही थी लेकिन किसी तरह मैंने अपने आप को संभाल लिया और क्लास में चले गए।

फिर स्कूल ख़त्म होने के बाद हम फिर मिले और कार की तरफ बढ़ चले। कार में बैठ
कर मैं कार स्टार्ट करने लगा तभी उसने कहा- आज कितनी बारिश हो रही है !
देखना, तुम्हारी कार स्टार्ट नहीं होगी !

उसका तो कहा ही हुआ और मेरी कार ने जवाब दे दिया, वो स्टार्ट नहीं हो रही थी।
ऊपर से ऋतु खिलखिला कर हँस रही थी।

पास के टेलीफोन बूथ से मैंने पापा को फोन किया और बताया कि कार स्टार्ट नहीं
हो रही है।

पापा ने कहा- कोई बात नहीं, मैं मकेनिक भेज कर कार ठीक करा दूंगा।

मैंने कार की चाबी स्कूल के चौकीदार को दे दी और हम पैदल घर की तरफ़ चल पड़े।
रास्ते में काफी बारिश थी सो हम काफी भीग चुके थे। ऋतु के घर पहुँच कर देखा
कि उसके घर पर ताला लगा है। पड़ोसी से पता लगा कि उसकी मम्मी मेरी मम्मी के
साथ कीर्तन में गई है।

मैंने कहा- कोई बात नहीं ऋतु ! मेरे पास मेरे घर की दूसरी चाबी है, वहीं चलो !

उसने कहा- ठीक है !

और मेरे मन की मुराद पूरी हो गई कि आज तो रितू की चूचियाँ दबा कर ही रहूँगा।
घर पहुँच कर मैंने ऋतु को तौलिया दिया और बोला- तुम अपना सर पौंछ लो, नहीं
सर्दी लग जाएगी !

मैं उसे मम्मी के कमरे में ले गया- तुम यहाँ करो, मैं चाय बना कर लाता हूँ।

और मैं दरवाज़ा बंद कर के चला गया। लेकिन मैं गया कहीं नहीं था, दरवाज़े के
पास खड़े होकर देख रहा था कि ऋतु क्या कर रही है।

पहले उसने शीशे के पास जाकर अपने आप को देखा और अपना सर पौंछने लगी। तभी उसकी
नज़र अपने वक्ष पर पड़ी तो देखा कि उसकी शर्ट का बटन खुला है। (जिसे मैं सुबह
देख रहा था) फिर उसने अपनी शर्ट क ऊपर से ही अपने स्तन दबाने चालू कर दिए।
उसे देख कर मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं पैंट से बाहर निकाल कर सहलाने लगा।
पता नहीं हल्की सी आहट से उसे पता चल गया कि मैं उसे देख रहा हूँ।

तभी उसने आवाज़ लगाई- रवि, बाहर क्यों खड़े हो ? अंदर आओ !

मेरे मन में तो लड्डू फूट गए। लंड को अंदर किये बिना मैं दरवाज़ा खोल कर अंदर
चला गया। मेरा लंड देख कर वो चौंक गई और बोली- यह क्या है?

मैंने कहा- यह नागराज है ! गर्म लड़कियों को देख कर खड़ा हो जाता है विष
छोड़ने के लिए !

उसने पास आकर मेरे लंड को पकड़ कर कहा- रवि सच बताओ, सुबह तुम मेरे स्तन को
क्यों देख रहे थे?

मैंने कहा- तेरी चूचियाँ हैं ही इतनी मस्त चीज़ कि दबाने को, चूसने को मन
करता है।

यह सुन कर उसने मेरे हाथ अपने वक्ष पर रख दिए और कहा- लो ! जो करना है करो !

बस फिर क्या था, मैंने उसकी शर्ट के सारे बटन खोल दिए और उसकी चूचियों की
लाइन पर अपना मुँह रख कर महसूस कर रहा था कि यह कोई सपना तो नहीं है !

तभी उसने मेरे लंड को जोर से दबा दिया और कहा- सिर्फ महसूस करोगे या चूसोगे
भी ?

फिर क्या था, मैंने झट से उसकी शर्ट उतारी, ब्रा उतारी और जोर से दबा दिया।
उसके मुँह से आह निकल गई- रवि, और जोर से !

मैंने और जोर से दबा कर उसके स्तनों को अपनी मुट्ठी में लेकर उसके चुचूक
चूसने लगा। वो मेरे लंड पर जोर से हाथ आगे पीछे कर रही थी। फिर धीरे धीरे मैं
अपने हाथ उसकी स्कर्ट के अन्दर डाल उसके चूतड़ों को भी दबाने लगा, उसकी पैंटी
नीचे करने के बाद उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा। वो एक दम गीली थी। मैं नीचे झुक
कर उसकी स्कर्ट के अन्दर अपना मुँह डाल कर चूत को चाटने लगा।वो पूरी मस्ती
में आ गई और मुझे पलंग पर धक्का दे कर मेरी पैंट खोल कर मेरे लंड को चूसने
लगी। मैं उसके वक्ष दबाये जा रहा था।

इतने में मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी।

वो बोली- देखो नागराज ने विष छोड़ दिया !

और वो पूरा चूस गई।

फिर मैं उसे पलंग पर लिटा कर उसकी चूत को चाटने लगा। वो पूरी तरह गर्म थी और
मेरे बाल नोच रही थी, कह रही थी- रवि मत तड़पाओ ! डाल दो अपना नागराज मेरी
सुरंग में !

मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रख कर एक जोर से झटका मारा और लंड अन्दर चला गया।
मैं थोड़ी देर उसके ऊपर लेट कर उसके स्तन चूसने लगा और नीचे नागराज अपना काम
करने लगा। दस मिनट बाद मेरे लंड ने पिचकारी छोड़ दी। मैंने कहा- नागराज ने
तेरी सुरंग में विष छोड़ दिया !

तो वह घबरा गई- अब क्या होगा ! मैं गर्भवती हो जाउंगी !

मैंने कहा- कोई बात नहीं ! मैं आई-पिल ला दूंगा, वो खा लेना, सब ठीक हो
जायेगा !

और हम फिर पूरी मस्ती से फिर चुदाई में लग गए...........


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तन का सुख

Posted On 00:40

मेरी शादी हुए करीब दस साल हो गये थे। इन दस सालों में मैं अपने पति से ही तन
का सुख प्राप्त करती थी। उन्हें अब डायबिटीज हो गई थी और काफ़ी बढ़ भी गई थी।
इसी कारण से उन्हें एक बार हृदयघात भी हो चुका था। अब तो उनकी यह हालत हो गई
थी कि उनके लण्ड की कसावट भी ढीली होने लगी थी। लण्ड का कड़कपन भी नहीं रहा
था। उनका शिश्न में बहुत शिथिलता आ गई थी। वैसे भी जब वो मुझे चोदने की कोशिश
करते थे तो उनकी सांस फ़ूल जाती थी, और धड़कन बढ़ जाती थी। अब धीरे धीरे
रणवीर से मेरा शारीरिक सम्बन्ध भी समाप्त होने लगा था। पर अभी मैं तो अपनी
भरपूर जवानी पर थी, 35 साल की हो रही थी।

जब से मुझे यह महसूस होने लगा कि मेरे पति मुझे चोदने के लायक नहीं रहे तो
मुझ पर एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव होने लगा। मेरी चुदाई की इच्छा बढ़ने लगी थी।
रातों को मैं वासना से तड़पने लगी थी। रणवीर को यह पता था पर मजबूर था। मैं
उनका लण्ड पकड़ कर खूब हिलाती थी और ढीले लण्ड पर मुठ भी मारती थी, पर उससे
तो उनका वीर्य स्खलित हो जाया करता था पर मैं तो प्यासी रह जाती थी।

मैं मन ही मन में बहुत उदास हो जाती थी। मुझे तो एक मजबूत, कठोर लौड़ा चाहिये
था ! जो मेरी चूत को जम के चोद सके। अब मेरा मन मेरे बस में नहीं था और मेरी
निगाहें रणवीर के दोस्तों पर उठने लगी थी। एक दोस्त तो रणवीर का खास था, वो
अक्सर शाम को आ जाया करता था।

मेरा पहला निशाना वही बना। उसके साथ अब मैं चुदाई की कल्पना करने लगी थी।
मेरा दिल उससे चुदाने के लिये तड़प जाता था। मैं उसके सम्मुख वही सब
घिसी-पिटी तरकीबें आजमाने लगी। मैं उसके सामने जाती तो अपने स्तनो को झुका कर
उसे दर्शाती थी। उसे बार बार देख कर मतलबी निगाहों से उसे उकसाती थी। यही
तरकीबें अब भी करगार साबित हो रही थी। मुझे मालूम हो चुका था था कि वो मेरी
गिरफ़्त में आ चुका है, बस उसकी शरम तोड़ने की जरूरत थी। मेरी ये हरकतें
रणवीर से नहीं छुप सकी। उसने भांप लिया था कि मुझे लण्ड की आवश्यकता है।

अपनी मजबूरी पर वो उदास सा हो जाता था। पर उसने मेरे बारे में सोच कर शायद
कुछ निर्णय ले लिया था। वो सोच में पड़ गया ...

"कोमल, तुम्हें भोपाल जाना था ना... कैसे जाओगी ?"

"अरे, वो है ना तुम्हारा दोस्त, राजा, उसके साथ चली जाऊंगी !"

"तुम्हें पसन्द है ना वो..." उसने मेरी ओर सूनी आंखो से देखा।

मेरी आंखे डर के मारे फ़टी रह गई। पर रणवीर के आंखो में प्यार था।

"नहीं ऐसी तो कोई बात नहीं है ... बस मुझे उस पर विश्वास है।"

"मुझे माफ़ कर देना, कोमल... मैं तुम्हें सन्तुष्ट नहीं कर पाता हूं, बुरा ना
मानो तो एक बात कहूं?"

"जी... ऐसी कोई बात नहीं है ... यह तो मेरी किस्मत की बात है..."

"मैं जानता हूं, राजा तुम्हें अच्छा लगता है, उसकी आंखें भी मैंने पहचान ली
है..."

"तो क्या ?..." मेरा दिल धड़क उठा ।

"तुम भोपाल में दो तीन दिन उसके साथ किसी होटल में रुक जाना ... तुम्हें मैं
और नहीं बांधना चाहता हूं, मैं अपनी कमजोरी जानता हूँ।"

"जानू ... ये क्या कह रहे हो ? मैं जिन्दगी भर ऐसे ही रह लूंगी।" मैंने रणवीर
को अपने गले लगा लिया, उसे बहुत चूमा... उसने मेरी हालत पहचान ली थी। उसका
कहना था कि मेरी जानकारी में तुम सब कुछ करो ताकि समय आने पर वो मुझे किसी भी
परेशानी से निकाल सके। राजा को भोपाल जाने के लिये मैंने राजी कर लिया।

पर रणवीर की हालत पर मेरा दिल रोने लगा था। शाम की डीलक्स बस में हम दोनों को
रणवीर छोड़ने आया था। राजा को देखते ही मैं सब कुछ भूल गई थी। बस आने वाले
पलों का इन्तज़ार कर रही थी। मैं बहुत खुश थी कि उसने मुझे चुदाने की छूट दे
दी थी। बस अब राजा को रास्ते में पटाना था। पांच बजे बस रवाना हो गई। रणवीर
सूनी आंखों से मुझे देखता रहा। एक बार तो मुझे फिर से रूलाई आ गई... उसका दिल
कितना बड़ा था ... उसे मेरा कितना ख्याल था... पर मैंने अपनी भावनाओं पर
जल्दी ही काबू पा लिया था।

हमारा हंसी मजाक सफ़र में जल्दी ही शुरू हो गया था। रास्ते में मैंने कई बार
उसका हाथ दबाया था, पर उसकी हिम्मत नहीं हो रही थी। पर कब तक वो अपने आप को
रोक पाता... आखिर उसने मेरा हाथ भी दबा ही दिया। मैं खुश हो गई...

रास्ता खुल रहा था। मैंने टाईट सलवार कुर्ता पहन रखा था। अन्दर पैंटी नहीं
पहनी थी, ब्रा भी नहीं पहनी थी। यह मेरा पहले से ही सोचा हुआ कार्यक्रम था ।
वो मेरे हाथों को दबाने लगा। उसका लण्ड भी पैंट में उभर कर अपनी उपस्थिति
दर्शा रहा था। उसके लण्ड के कड़कपन को देख कर मैं बहुत खुश हो रही थी कि अब
इसे लण्ड से मस्ती से चुदाई करूंगी। मैं किसी भी हालत में राजा को नहीं
छोड़ने वाली थी।

"कोमल ... क्या मैं तुम्हें अच्छा लगता हूं...?"

"हूं ... अच्छे लोग अच्छे ही लगते हैं..." मैंने जान कर अपना चहरा उसके चेहरे
के पास कर लिया। राजा की तेज निगाहें दूसरे लोगों को परख रही थी, कि कोई
उन्हें देख तो नहीं रहा है। उसने धीरे से मेरे गाल को चूम लिया। मैं मुस्करा
उठी ... मैंने अपना एक हाथ उसकी जांघो पर रख दिया और हौले हौले से दबाने लगी।
मुझे जल्दी शुरूआत करनी थी, ताकि उसे मैं भोपाल से पहले अपनी अदाओं से घायल
कर सकूं।

यही हुआ भी ...... सीटे ऊंची थी अतः वो भी मेरे गले में हाथ डाल कर अपना हाथ
मेरी चूचियों तक पहुँचाने की कोशिश करने लगा। पर हाय राम ! बस एक बार उसने
कठोर चूचियों को दबाया और जल्दी से हाथ हटा लिया। मैं तड़प कर रह गई। बदले
में मैंने भी उसका उभरा लण्ड दबा दिया और सीधे हो कर बैठ गई। पर मेरा दिल
खुशी से बल्लियों उछल रहा था। राजा मेरे कब्जे में आ चुका था। अंधेरा बढ़
चुका था... तभी बस एक मिड-वे पर रुकी।

राजा दोनों के लिये शीतल पेय ले आया। कुछ ही देर में बस चल पड़ी। दो घण्टे
पश्चात ही भोपाल आने वाला था। मेरा दिल शीतल पेय में नहीं था बस राजा की ओर
ही था। मैं एक हाथ से पेय पी रही थी, पर मेरा दूसरा हाथ ... जी हां उसकी पैंट
में कुछ तलाशने लगा था ... गड़बड़ करने में मगशूल था। उसका भी एक हाथ मेरी
चिकनी जांघों पर फ़िसल रहा था। मेरे शरीर में तरावट आने लगी थी। एक लम्बे समय
के बाद किसी मर्द के साथ सम्पर्क होने जा रहा था। एक सोलिड तना हुआ लण्ड चूत
में घुसने वाला था। यह सोच कर ही मैं तो नशे में खो गई थी।

तभी उसकी अंगुली का स्पर्श मेरे दाने पर हुआ। मैं सिह उठी। मैंने जल्दी से
इधर उधर देखा और किसी को ना देखता पा कर मैंने चैन की सांस ली। मैंने अपनी
चुन्नी उसके हाथ पर डाल दी। अंधेरे का फ़ायदा उठा कर उसने मेरी चूचियाँ भी
सहला दी थी। मैं अब स्वतन्त्र हो कर उसके लण्ड को सहला कर उसकी मोटाई और
लम्बाई का जायजा ले रही थी।

मैं बार बार अपना मुख उसके होंठों के समीप लाने का प्रयत्न कर रही थी। उसने
भी मेरी तरफ़ देखा और मेरे पर झुक गया। उसके गीले होंठ मेरे होंठों के कब्जे
में आ गये थे। मौका देख कर मैंने पैंट की ज़िप खोल ली और हाथ अन्दर घुसा
दिया। उसका लण्ड अण्डरवियर के अन्दर था, पर ठीक से पकड़ में आ गया था।

वो थोड़ा सा विचलित हुआ पर जरा भी विरोध नहीं किया। मैंने उसकी अण्डरवियर को
हटा कर नंगा लण्ड पकड़ लिया। मैंने जोश में उसके होंठों को जोर से चूस लिया
और मेरे मुख से चूसने की जोर से आवाज आई। राजा एक दम से दूर हो गया। पर बस की
आवाज में वो किसी को सुनाई नहीं दी। मैं वासना में निढाल हो चुकी थी। मन कर
रहा था कि वो मेरे अंगों को मसल डाले। अपना लण्ड मेरी चूत में घुसा डाले ...
पर बस में तो यह सब सम्भव नहीं था। मैं धीरे धीरे झुक कर उसकी जांघों पर अपना
सर रख लिया। उसकी जिप खुली हुई थी, लण्ड में से एक भीनी भीनी से वीर्य जैसी
सुगन्ध आ रही थी। मेरे मुख से लण्ड बहुत निकट था, मेरा मन उसे अपने मुख में
लेने को मचल उठा। मैंने उसका लण्ड पैंट में से खींच कर बाहर निकाल लिया और
अपने मुख से हवाले कर लिया। राजा ने मेरी चुन्नी मेरे ऊपर डाल दी। उसके लण्ड
के बस दो चार सुटके ही लिये थे कि बस की लाईटें जल उठी थी। भोपाल आ चुका था।
मैंने जैसे सोने से उठने का बहाना बनाया और अंगड़ाई लेने लगी। मुझे आश्चर्य
हुआ कि सफ़र तो बस पल भर का ही था ! इतनी जल्दी कैसे आ गया भोपाल ? रात के नौ
बज चुके थे।

रास्ते में बस स्टैण्ड आने के पहले ही हम दोनों उतर गये। राजा मुझे कह रहा था
कि घर यहाँ से पास ही है, टैक्सी ले लेते हैं। मैं यह सुन कर तड़प गई- साला
चुदाई की बात तो करता नहीं है, घर भेजने की बात करता है।

मैंने राजा को सुझाव दिया कि घर तो सवेरे चलेंगे, अभी तो किसी होटल में भोजन
कर लेते हैं, और कहीं रुक जायेंगे। इस समय घर में सभी को तकलीफ़ होगी। उन्हें
खाना बनाना पड़ेगा, ठहराने की कवायद शुरू हो जायेगी, वगैरह।

उसे बात समझ में आ गई। राजा को मैंने होटल का पता बताया और वहाँ चले आये।

"तुम्हारे घर वाले क्या सोचेंगे भला..."

"तुम्हें क्या ... मैं कोई भी बहाना बना दूंगी।"

कमरे में आते ही रणवीर का फोन आ गया और पूछने लगा। मैंने उसे बता दिया कि
रास्ते में तो मेरी हिम्मत ही नहीं हुई, और हम दोनों होटल में रुक गये हैं।

"किसका फोन था... रणवीर का ...?"

"हां, मैंने बता दिया है कि हम एक होटल में अलग अलग कमरे में रुक गये हैं।"

"तो ठीक है ..." राजा ने अपने कपड़े उतार कर तौलिया लपेट लिया था, मैंने भी
अपने कपड़े उतारे और ऊपर तौलिया डाल लिया।

"मैं नहाने जा रही हूँ ..."

"ठीक है मैं बाद में नहा लूंगा।"

मुझे बहुत गुस्सा आया ... यूं तो हुआ नहीं कि मेरा तौलिया खींच कर मुझे नंगी
कर दे और बाथ रूम में घुस कर मुझे खूब दबाये ... छीः ... ये तो लल्लू है। मैं
मन मार कर बाथ रूम में घुस गई और तौलिया एक तरफ़ लटका दिया। अब मैं नंगी थी।

मैंने झरना खोल दिया और ठण्डी ठण्डी फ़ुहारों का आनन्द लेने लगी।

"कोमल जी, क्या मैं भी आ जाऊं नहाने...?"

मैं फिर से खीज उठी... कैसा है ये आदमी ... साला एक नंगी स्त्री को देख कर भी
हिचकिचा रहा है। मैंने उसे हंस कर तिरछी निगाहों से देखा। वो नंगा था ...

उसका लण्ड तन्नाया हुआ था। मेरी हंसी फ़ूट पड़ी।

"तो क्या ऐसे ही खड़े रहोगे ... वो भी ऐसी हालत में ... देखो तो जरा..."

मैंने अपना हाथ बढ़ाकर उसका हाथ थाम लिया और अपनी ओर खींच लिया। उसने एक गहरी
सांस ली और उसने मेरी पीठ पर अपना शरीर चिपका लिया। उसका खड़ा लण्ड मेरे
चूतड़ों पर फ़िसलने लगा। मेरी सांसें तेज हो गई। मेरे गीले बदन पर उसके हाथ
फ़िसलने लगे। मेरी भीगी हुई चूचियाँ उसने दबा डाली। मेरा दिल तेजी से धड़कने
लगा था। हम दोनों झरने की बौछार में भीगने लगे। उसका लण्ड मेरी चूतड़ों की
दरार को चीर कर छेद तक पहुंच गया था। मैं अपने आप झुक कर उसके लण्ड को रास्ता
देने लगी। लण्ड का दबाव छेद पर बढ़ता गया और हाय रे ! एक फ़क की आवाज के साथ
अन्दर प्रवेश कर गया। उसका लण्ड जैसे मेरी गाण्ड में नहीं बल्कि जैसे मेरे
दिल में उतर गया था। मैं आनन्द के मारे तड़प उठी।

आखिर मेरी दिल की इच्छा पूरी हुई। एक आनन्द भरी चीख मुख से निकल गई।

उसने लण्ड को फिर से बाहर निकाला और जोर से फिर ठूंस दिया। मेरे भीगे हुये
बदन में आग भर गई। उसके हाथों ने मेरे उभारों को जोर जोर से हिलाना और मसलना
आरम्भ कर दिया था। उसका हाथ आगे से बढ़ कर चूत तक आ गया था और उसकी दो
अंगुलियां मेरी चूत में उतर गई थी। मैंने अपनी दोनों टांगें फ़ैला ली थी।

उसके शॉट तेज होने लगे थे। अतिवासना से भरी मैं बेचारी जल्दी ही झड़ गई।

उसका वीर्य भी मेरी टाईट गाण्ड में घुसने के कारण जल्दी निकल गया था।

हम स्नान करके बाहर आ गये थे। पति पत्नी की तरह हमने एक दूसरे को प्यार किया
और रात्रि भोजन हेतु नीचे प्रस्थान कर गये।

तभी रणवीर का फोन आया," कैसी हो। बात बनी या नहीं...?"

"नहीं जानू, वो तो सो गया है, मैं भी खाना खाकर सोने जा रही हूँ !"

"तुम तो बुद्धू हो, पटे पटाये को नहीं पटा सकती हो...?"

"अरे वो तो मुझे भाभी ही कहता रहा ... लिफ़्ट ही नहीं मार रहा है, आखिर
तुम्हारा सच्चा दोस्त जो ठहरा !"

"धत्त, एक बार और कोशिश करना अभी ... देखो चुद कर ही आना ...।"

"अरे हां मेरे जानू, कोशिश तो कर रही हूँ ना ... गुडनाईट"

मैं मर्दों की फ़ितरत पहचानती थी, सो मैंने चुदाई की बात को गुप्त रखना ही
बेहतर समझा। राजा मेरी बातों को समझने की कोशिश कर रहा था। हम दोनों खाना
खाकर सोने के लिये कमरे में आ गये थे। मेरी तो यह यात्रा हनीमून जैसी थी,
महीनों बाद मैं चुदने वाली थी। गाण्ड तो चुदा ही चुकी थी। मैंने तुरंत हल्के
कपड़े पहने और बिस्तर पर कूद गई और टांगें पसार कर लेट गई।

"आओ ना ... लेट जाओ ..." उसका हाथ खींच कर मैंने उसे भी अपने पास लेटा दिया।

"राजा, घर पर तुमने खूब तड़पाया है ... बड़े शरीफ़ बन कर आते थे !"

"आपने तो भी बहुत शराफ़त दिखाई... भैया भैया कह कर मेरे लण्ड को ही झुका देती
थी !"

"तो और क्या कहती, सैंया... सैंया कहती ... बाहर तो भैया ही ठीक रहता है।"

मैं उसके ऊपर चढ़ गई और उसकी जांघों पर आ गई।

"यह देख, साला अब कैसा कड़क रहा है ... निकालूँ मैं भी क्या अपनी फ़ुद्दी..."
मैंने आंख मारी।

"ऐ हट बेशरम ... ऐसा मत बोल..." राजा मेरी बातों से झेंप गया।

"अरे जा रे ... मेरी प्यारी सी चूत देख कर तेरा लण्ड देख तो कैसा जोर मार रहा
है।"

"तेरी भाषा सुन कर मेरा लण्ड तो और फ़ूल गया है..."

"तो ये ले डाल दे तेरा लण्ड मेरी गीली म्यानी में...।"

मैंने अपनी चूत खोल कर उसका लाल सुपाड़ा अपनी चूत में समा दिया। एक सिसकारी
के साथ मैं उससे लिपट पड़ी। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि किसी गैर मर्द का
लण्ड मेरी प्यासी चूत में उतर रहा है। मैंने अपनी चूत का और जोर लगाया और उसे
पूरा समा लिया। उसका फ़ूला हुआ बेहद कड़क लौड़ा मेरी चूत के अन्दर-बाहर होने
लगा था। मैं आहें भर भर कर अपनी चूत को दबा दबा कर लण्ड ले रही थी। मुझमें
अपार वासना चढ़ी जा रही थी। इतनी कि मैं बेसुध सी हो गई। जाने कितनी देर तक
मैं उससे चुदती रही। जैसे ही मेरा रस निकला, मेरी तन्द्रा टूटी। मैं झड़ रही
थी, राजा भी कुछ ही देर में झड़ गया।

मेरा मन हल्का हो गया था। मैं चुदने से बहुत ही प्रफ़ुल्लित थी। कुछ ही देर
में मेरी पलकें भारी होने लगी और मैं गहरी निद्रा में सो गई। अचानक रात को
जैसे ही मेरी गाण्ड में लण्ड उतरा, मेरी नींद खुल गई। राजा फिर से मेरी गाण्ड
से चिपका हुआ था। मैं पांव फ़ैला कर उल्टी लेट गई। वो मेरी पीठ चढ़ कर मेरी
गाण्ड मारने लगा। मैं लेटी लेटी सिसकारियाँ भरती रही। उसका वीर्य निकल कर
मेरी गाण्ड में भर गया। हम फिर से लेट गये। गाण्ड चुदने से मेरी चूत में फिर
से जाग हो गई थी। मैंने देखा तो राजा जाग रहा था। मैंने उसे अपने ऊपर खींच
लिया और मैं एक बार फिर से राजा के नीचे दब गई। उसका लण्ड मेरी चूत को मारता
रहा। मेरी चूत की प्यास बुझाता रहा। फिर हम दोनों स्खलित हो गये। एक बार फिर
से नींद का साम्राज्य था। जैसे ही मेरी आंख खुली सुबह के नौ बज रहे थे।

"मैं चाय मंगाता हूँ, जितने तुम फ़्रेश हो लो !"

नाश्ता करने के बाद राजा बोला,"अब चलो तुम्हें घर पहुंचा दूँ..."

पर घर किसे जाना था... यह तो सब एक सोची समझी योजना थी।

"क्या चलो चलो कर रहे हो ?... एक दौर और हो जाये !"

राजा की आंखे चमक उठी ... देरी किस बात की थी... वो लपक कर मेरे ऊपर चढ़ गया।

मेरे चूत के कपाट फिर से खुल गये थे। भचाभच चुदाई होने लगी थी। बीच में दो
बार रणवीर का फोन भी आया था। चुदने के बाद मैंने रणवीर को फोन लगाया।

"क्या रहा जानू, चुदी या नहीं...?"

"अरे अभी तो वो उठा है ... अब देखो फिर से कोशिश करूंगी..."

तीन दिनों तक मैं उससे जी भर कर चुदी, चूत की सारी प्यास बुझा ली। फिर जाने
का समय भी आया। राजा को अभी तक समझ नहीं आया था कि यहाँ तीन तक हम दोनों
मात्र चुदाई ही करते रहे... मैं अपने घर तो गई ही नहीं।

"पर रणवीर को पता चलेगा तो...?"

"मुझे रणवीर को समझाना आता है !"

घर आते ही रणवीर मुझ पर बहुत नाराज हुआ। तीन दिनों में तुम राजा को नहीं पटा
सकी।

"क्या करूँ जानू, वो तो तुम्हारा सच्चा दोस्त है ना... हाथ तक नहीं लगाया !"

"अच्छा तो वो चिकना अंकित कैसा रहेगा...?"

"यार उसे तो मैं नहीं छोड़ने वाली, चिकना भी है... उसके ऊपर ही चढ़ जाऊंगी..."

रण्वीर ने मुझे फिर प्यार से देखा और मेरे सीने को सहला दिया।

"सीऽऽऽऽऽऽ स स सीईईईई ...ऐसे मत करो ना ... फिर चुदने की इच्छा हो जाती है।"

"ओह सॉरी... जानू ... लो वो अंकित आ गया !"

अंकित को फ़ंसाना कोई कठिन काम नहीं था, पर रणवीर के सामने यह सब कैसे
होगा...। उसे भी धीरे से डोरे डाल कर मैंने अपने जाल में फ़ंसा लिया। फिर
दूसरा पैंतरा आजमाया। सुरक्षा के लिहाज से मैंने देखा कि अंकित का कमरा ही
अच्छा था। उसके कमरे में जाकर चुद आई और रणवीर को पता भी ही नहीं चल पाया।

मुझे लगा कि जैसे मैं धीरे धीरे रण्डी बनती जा रही हूँ ... मेरे पति देव अपने
दोस्तों को लेकर आ जाते थे और एक के बाद एक नये लण्ड मिलते ही जा रहे थे ...
और मैं कोई ना कोई पैंतरा बदल कर चुद आती थी... है ना यह गलत बात !

पतिव्रता होना पत्नी का पहला कर्तव्य है। पर आप जानते है ना चोर तो वो ही
होता है जो चोरी करता हुआ पकड़ा जाये ... मैं अभी तक तो पतिव्रता ही हूँ ...
पर चुदने से पतिव्रता होने का क्या सम्बन्ध है ? यह विषय तो बिल्कुल अलग है।
मैं अपने पति को सच्चे दिल से चाहती हूँ। उन्हें चाहना छोड़ दूंगी तो मेरे
लिये मर्दों का प्रबन्ध कौन करेगा भला ?

मेरे जानू... मेरे दिलवर, तुम्हारे लाये हुये मर्द से ही तो मैं चुदती हूँ ...


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विदेशी का दीवाना

Posted On 00:39

मेरा नाम अशोक है। मेरी आयु चौबीस साल है। मैं अजमेर में पिछले तीन सालों से
टूरिस्ट गाइड का काम कर रहा हूँ, मेरा काम टूरिस्टों को होटलों में ठहराने और
शहर घुमाने का है। कई बार विदेशी टूरिस्ट भी मिल जाते हैं जिनसे काफी कमाई हो
जाती है इसलिए मैंने अंग्रेजी, स्पेनिश और इटालियन भाषा भी सीख रखी है। मैं
टूरिस्टों की तलाश में रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर चक्कर लगाता रहता हूँ।
काफी दिनों से मेरी इच्छा किसी विदेशी लड़की को चोदने की थी लेकिन आज तक कोई
ऐसा मौका नहीं मिला था। वैसे मैंने अपने ही शहर की कई लड़कियों को चोदा है।
मेरा लंड भी नौ इंच का है जिसे लड़कियाँ बहुत पसंद करती हैं।
एक दिन मैंने रेलवे स्टेशन पर दो विदेशी लड़कियों को देखा जो काफी परेशान
दिखाई दे रही थीं और फोन पर किसी से जोर जोर से बातें कर रही थीं। मैंने
हिम्मत करके उनसे पूछा- क्या मैं आपकी कोई मदद कर सकता हूँ?
मैंने उन्हें अपना आई-कार्ड दिखाया और उनकी समस्या के बारे में पूछा तो
उन्होंने बताया कि उन्होंने जिस होटल में अपना कमरा बुक किया था वह कन्फर्म
नहीं हो सका है इसलिए उन्हें सिर्फ़ दो दिनों के लिए ठहरने की व्यवस्था चाहिए।
मैंने दो-तीन होटलों से पता किया लेकिन कहीं जगह नहीं मिल सकी। इससे दोनों
लडकियाँ काफी निराश हो गई। उन में एक लड़की काली और दूसरी गोरी थी। जब मैंने
उनके बारे में पूछा तो काली ने अपना नाम फ्रेंकी बताया और आयु चौबीस साल
बताई, दूसरी लड़की ने अपना नाम ब्रियाना बताया, आयु बाईस साल। ब्रियाना
अमेरिकन थी, फ्रेंकी ब्राजीलियन थी। दोनों अजमेर का पुष्कर मेला देखने आई थीं
और उन्हें दो दिन बाद ही अपने देश वापिस जाना था। मेले के कारण सभी होटलों के
सारे कमरे भरे हुए थे।
तभी मुझे अचानक याद आया कि मेरे दोस्त बंटी का अजमेर से बीस मील दूर ख़ुद का
एक फार्म हाउस है, जिसका बंगला खाली पड़ा हुआ है। मैंने लड़कियों से पूछा कि
अगर वह चाहें तो में उस बंगले में उनके रहने की व्यवस्था करा सकता हूँ, ऐसी
दशा में और कोई उपाय नहीं है। मैंने लड़कियों को भरोसा दिलाया कि उन्हें मेरे
दोस्त के बंगले में कोई डर नहीं होगा, वह आराम से जितने दिन चाहें रह सकतीं
हैं। उनके लिए सारा इंतज़ाम कर दिया जाएगा और उन्हें इसके लिए कोई पैसा भी
नहीं देना पड़ेगा।
दोनों फ़ौरन तैयार हो गई। मैंने उनका सामान टैक्सी में रखवाया और बंटी को फोन
से बताया कि वह जल्दी से खाने पीने का सारा सामान और दो बोतल व्हिस्की लेकर
जल्दी से अपने फार्म हाउस वाले बंगले पर पहुँच जाए, आज मैंने दो विदेशी
लड़कियाँ फांस ली हैं, जिनमें एक गोरी और एक काली है। अगर किस्मत ने साथ दिया
तो मिल कर दोनों की चुदाई करेंगे। मेरा दोस्त बंटी भी विदेशी चूत का दीवाना
है, उसकी उमर बाईस साल है। वह थोड़ी अंग्रेजी भी जानता है।
वह एक घंटे में ही सारा सामान लेकर आ गया। यह देख कर लड़कियाँ बहत खुश हो गई
और धन्यवाद देने लगीं।
फ्रेश होने के बाद हम सब सोफे पर बैठ गए। मैंने चार पैग बनाए और प्लेट में
चिप्स और काजू रख दिए। फ़िर हम बातें करने लगे। मैंने लड़कियों से पूछा कि
क्या वे अपने देश में जाकर शादी करने जा रही हैं?
तो वह बोलीं- ऐसा नहीं है ! हम लोग लोग शादी में विश्वास नहीं रखते, हम तो
खुले-सेक्स में विश्वास रखते हैं। हमारा मानना है कि हमारा जीवन सिर्फ़ सेक्स
के लिए ही बना है। हर इंसान को मरते दम तक सेक्स करना चाहिए। दुनिया में इससे
अच्छा कुछ भी नहीं है। हमारा शरीर मौजमस्ती के लिए ही बना है।
इतना सुनते ही बंटी ने फ्रेंकी को चूम लिया और बाहों में ले लिया। फ्रेंकी ने
भी मेरे दोस्त को चूम कर उसके मुँह में अपनी जीभ घुसा दी। बंटी का लंड खड़ा हो
गया था, उसका लण्ड दस इंच का है। फ्रेंकी ने उसकी पैंट को खोल कर लण्ड बाहर
निकाला और चूसने लगी।
लड़कियों ने भी अपनी अपनी शर्ट निकाल दी। उनके बड़े बड़े गोरे काले स्तन बड़े
सेक्सी लग रहे थे। मैं ब्रियाना के मम्मे दबाने लगा और चूसने लगा। मेरा दोस्त
फ्रेंकी को नंगा करना चाहता था और चोदना चाहता था। जब उसने फ्रेंकी के कपड़े
उतारे तो वह भौंचक्का रह गया। लड़की की जाँघों के बीच में चूत की जगह बारह
इंची लंबा मोटा लंड लटक रहा था। यह देख कर मैंने भी ब्रियाना के कपड़े उतार
दिए। वहाँ भी लंबा लंड चमक रहा था, जिसका सुपारा खुला हुआ था।
बंटी को समझ में नहीं आ रहा था कि यह क्या माजरा है। वह मेरी तरफ़ देखने लगा,
मैंने उसे समझाया कि ये लड़कियां नहीं बल्कि लंड-कन्याएँ हैं, इन्हें विदेशों
में शीमेल या लेडी-बॉय कहते हैं। दुनिया में ऐसी लाखों लेडी-बॉय हैं, ये
अक्सर गांड मरवाती हैं और मार भी सकती हैं, यह लड़कियों की चुदाई भी कर सकती
हैं। अगर कोई एक बार इनकी गांड मार लेगा तो वह चूत को भूल जाएगा क्योंकि इनकी
गांड काफी कसी होती है जिसमे लंड पूरी तरह से फिट हो जाता है, इनसे गांड
मरवाने से भी बहुत मजा आता है और मारने वाले को चूत से दस गुना आनंद आता है।
तभी फ्रेंकी ने मेरे दोस्त को झुकने कहा जिससे बंटी की गांड साफ़ दिखाई देने
लगी। फ़िर फ्रेंकी ने अपने बैग से एक क्रीम निकाली और बंटी की गांड पर लगा दी।
बंटी की गांड लपलपा रही थी। फ्रेंकी ने अपने लंबे मोटे काले लंड का सुपारा
बंटी की गांड के छेद पर रख दिया। सुपारा गांड में घुस गया। फ़िर धीमे धीमे आधा
लंड अन्दर उतार दिया और जोर का एक ऐसा धक्का मारा कि सारा लंड गांड फाड़ कर
भीतर चला गया।
बंटी चिल्लाया- अशोक मेरी गांड फट रही है ! इसने मेरी गांड में मूसल घुसा
दिया है !
मैंने कहा- ज़रा हिम्मत रखो, कुछ नहीं होगा !
पाँच मिनट बाद फ्रेंकी ने लंड की स्पीड तेज कर दी और दनादन गांड मारने लगी।
बंटी की गांड ढीली हो चुकी थी, वह मज़े से गांड मरवाने लगा, उसे मजा आने लगा।
बीस मिनट तक गांड मारने के बाद फ्रेंकी ने लंड बाहर निकालाऔर अपना सारा वीर्य
मेरे दोस्त के मुँह में निकाल दिया जिसे वह बड़े मजे से पी गया। फ़िर फ्रेंकी
ने बंटी का लंड चूस कर उसे खड़ा किया और अपनी गांड सामने कर दी।
बंटी ने भी दबादब फ्रेंकी गांड मारना शुरू कर दी। उसे अपना बदला भी लेना था,
उसने फ्रेंकी की इतनी जोर से गांड मारी कि वह हर धक्के पर ओह ओह ओ माय फक .फक
मी .फक मी.उ उ उ कर रही थी। करीब चालीस मिनट तक गांड मारने बाद ही मेरा दोस्त
झड़ सका।
इसी तरह ब्रियाना मेरी और मैंने उसकी रात तक गांड मारी। इतना मजा हमने
जिन्दगी में नहीं पाया था।
सवेरे जब हम सो कर उठे तो हमारी गांड सूजी हुई थीं। लेकिन हम बहुत खुश थे, हम
अजमेर के पहले व्यक्ति थे जिन्होंने लंड-कन्याओं की गांड मारी और उनसे गांड
भी मरवाई थी। बाद में हम सब एक साथ बैठे और अपना वीर्य निकाल कर एक ग्लास में
डाला और व्हिस्की में मिला कर सबने पिया और हमेशा के लिए दोस्ती पक्की कर ली।


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जब मैं इन्ज्नीरिंग कर रहा था

Posted On 00:38

पहले अपने बारे मैं बताता हूँ, मेरा नाम सुनील है, मैं गुड़गाँव मैं रहता हूँ,
मैं बाईस साल का हूँ, मेरे दोस्त मुझे सल्लू बुलाते हैं। क्योंकि मेरी बॉडी
सलमान खान की तरह दिखती है, मैं काफी समय से जिम कर रहा हूँ, अब मैं अपनी
कहानी पर आता हूँ।
बात उस समय की है, जब मैं इन्ज्नीरिंग कर रहा था और हॉस्टल में करनाल में
रहता था। रोजाना जिम जाते समय एक लड़की मुझे देख कर मुस्कराती थी, वो दिखने
में थोड़ी सांवली थी इसलिए मैं उसकी तरफ ज्यादा ध्यान नहीं देता था, मैं
मार्केट में जूस पीने जाता तो वो भी अपनी सहेलियों के साथ वहीं आ जाती और
मुझे देखती रहती।
ऐसा एक सप्ताह तक चला, मैंने अपने रूम पार्टनर को बताया तो उसने मुझे कहा- वो
लड़की तुझसे चुदना चाहती है इसलिए तुझे लाइन देती है।
मैं एक कंप्यूटर सेण्टर में सायं 5 बजे से 8 बजे तक पढ़ाता भी था। वो लड़की
वहाँ कंप्यूटर सीखने आने लगी। उसने मुझे अपना नाम ऋतु बताया। मैं उस समय
सिर्फ खाने-पीने, जिम जाने में मस्त रहता था।
सर्दियों के दिन थे, एक दिन मुझे कोलेज से आने में देर हो गई और सारे छात्र
अपने घर चले गए, सिर्फ ऋतु अकेली वहाँ बैठी थी, उसे अकेला देख कर मैं घबरा सा
गया।
उसने मुझे कहा- गुड इवनिंग सर !
इस पर मैंने पूछ लिया- कैसी हो तुम ?
उसने मुझे जवाब दिया कि आप तो सब जानते हैं। मैं समझ गया कि आज फंस गया। उसने
उस दिन कुरता सलवार पहना हुआ था, मैंने उसे कहा- तुम घर जाओ, मैं सबकी क्लास
कल लूँगा !
मैं वहाँ से चलने लेगा तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और कहा- सर मैं आप से प्यार
करती हूँ और शादी करना चाहती हूँ !
वो मेरे गले से लग गई, गले लगते ही उसकी गरम-गरम छातियों ने मेरे अंदर आग लगा
दी, उसके स्तन बड़े बड़े थे। मैंने उसके होटों को चूमना शुरु कर दिया और उसके
स्तनों को दबाने लगा। उसके बाद मैंने उसकी पैंटी में हाथ दे दिया और उसकी बुर
में ऊँगली डाल दी।
उसके मुँह से आह आह ... की आवाजें निकलने लगी। मैंने ऊँगली की रफ़्तार तेज कर
दी और वो जोर जोर से आह आह ....उई उई उई... उहं उहं उहं करने लगी।
मैं उसके कपड़े उतरने लगा तो उसने मना कर दिया और कहा- बाकी शादी के बाद
करेंगे !
यह सुनते ही मैंने उसकी चूत में जोर-जोर से ऊँगली करनी शुरु कर दी ! उसके
मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगी। वो अपने को मुझसे छुड़ाने की कोशिश करने लगी
मगर मैंने उसको छुटने मौका ही नहीं दिया और कुछ समय बाद उसकी चूत से पानी
निकल गया।
उसके बाद मैं दोबारा से उसके होंट चूसने लगा और उरोज़ दबाने लगा, वो दोबारा से
गर्म हो गई लेकिन इस बार मैंने उसे गर्म करके छोड़ दिया और कहा- अगर मुझसे
सच्चा प्यार करती हो तो तुम्हें मेरे साथ सेक्स करना होगा, नहीं तो मैं जा
रहा हूँ !
यह सुनते ही उसने गर्दन हिला कर हामी भर दी।
फिर क्या था, मैं उस पर टूट पड़ा और उसके सलवार और पैंटी को उतार दिया। उसके
बाद उसकी बुर मेरे सामने थी। उसकी बुर पर छोटे-छोटे बाल थे। फिर मैंने अपनी
पैंट और अन्डरवीयर उतार दी। मेरा आठ इंच लम्बा और दो इंच मोटा लंड उसके सामने
था। उसे देख कर वो डर गई।
फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और हल्का सा धक्का दिया, चूत का साइज़
छोटा होने के कारण लंड फिसल गया। फिर ऋतु ने लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर रखा
और मैंने एक जोरदार धक्का लगाया और मेरा आधा लंड अंदर चला गया।
ऋतु की चीख निकल पड़ी, वो छटपटाने लगी। मैंने उसकी होंटों को अपने होंटों में
भर लिया और चूसने लगा। लंड थोड़ा थोड़ा अंदर-बाहर करने लगा। थोड़ी देर बाद एक और
धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड अंदर चला गया। इस बार ऋतू रोने लग गई, उसकी
चूत से खून बहने लगा।
मैंने उसको गले से लगा लिया और कुछ देर बाद धीरे धीरे धक्के मारने शुरु कर
दिय, उसे मजा आने लगा। फिर वो भी साथ देने लगी और जोर जोर धक्के मारने लगी,
मुझसे जोर से लिपट गई और झड़ गई। मैं अब जोर जोर झटके मारने लगा, उसके मुँह से
आह आह ...उहं उहं उहं की आवाज निकल रही थी। फिर मैंने झटके की रफ़्तार को और
बढ़ाया, उसकी चूत लाल हो गई और ऋतू को बहुत दर्द हो रहा था, ऋतु तीन बार झड़
चुकी थी, मैं भी झड़ना चाहता था मगर मेरा वीर्य नहीं निकल रहा था और ऋतू की
हालत ख़राब हो गई थी, घर्षण के कारण चूत में दर्द हो रहा था। चूत बहुत गरम हो
गई थी, मैं पसीने में नहा गया था। उस दिन लगभग एक घंटे के बाद मेरा वीर्य
निकला।
ऋतु ने जल्दी से कपड़े पहने और चली गई। कंप्यूटर सेण्टर के मालिक के आने का
समय हो गया था।
तीन दिन बाद मैंने ऋतु को अपने दोस्त के कमरे पर बुलाया जो की कंप्यूटर
सेण्टर के बिलकुल नजदीक था। ऋतू शाम के 5 बजे कमरे पर पहुँच गई। हम दोनों
अंदर चले गए और मेरे दोस्त ने बाहर से कमरे को ताला लगा दिया ताकि किसी को शक
नो हो।
मैंने ऋतु को अपनी बाँहों में भर लिया, और दोनों एक दूसरे के होंटों को चूसने
लग गए। मैं उसके वक्ष को दबाने लगा। ऋतू को गरम होते देर न लगी और वो चुदने
के लिए तैयार हो गई। मैंने एक कंडोम निकाला और लंड पर चढ़ा लिया और ऋतु की
चूत में डालने लगा, मगर चिकनाई कम होने के कारण अन्दर नहीं गया, फिर मैंने
तेल लगाया और एक झटका मारा और आधा अन्दर गया और फिर एक जोरदार झटका दिया तो
पूरा का पूरा अन्दर चला गया। ऋतु को हल्का हल्का दर्द हो रहा था। ऋतु अपनी
गांड को उठा कर साथ देने लगी और दोनों एक से बढ़कर एक झटके मार रहे थे कि ऋतु
का पानी छुट गया। मैं जोर जोर से झटके मार रहा था मगर पहले की तरह मेरा वीर्य
नहीं निकल रहा था। एक घंटे से ज्यादा समय हो गया था, ऋतू परेशान हो गई और उस
जोरो से दर्द होने लगा। उसने मुझे छोड़ने को कहा और मैंने उस छोड़ दिया और वो
कपड़े पहन कर चली गई !
उस दिन के बाद उसने मुझे कभी भी अपनी चूत के दर्शन नहीं कराये ! इस प्रकार
मेरी और ऋतु की प्रेम कहानी का अंत हो गया !
उसके बाद मैं डॉक्टर के पास से टेस्ट करवाया और पाया गया कि मैं जो सप्लीमेंट
बॉडी बनाने के लिए खाता था उसकी वजह से यह आज तक हो रहा है। इसलिये मैं सेक्स
नहीं करता और सोचता हूँ कि बाद में यह समस्या ठीक हो जाएगी।


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मौसी की बात

Posted On 00:37

एक दिन मैं बाज़ार घूमने गई। मुझे बाज़ार में मेरी पुरानी सहेली उमा मिल गई, वो
मुझसे बोली कि उसके पति बाहर गए हुए हैं और मुझे अपने साथ रहने को कहा।
उमा मेरी अच्छी दोस्त थी। मेरी दोस्त होने के कारण उसकी भाभी से भी दोस्ती थी
लेकिन वो बदमाश टाइप लड़की थी और पैसे के लिए बहुत लालची थी, शादी से पहले वो
मेरे साथ हॉस्टल में रहती थी तो उसकी एक कॉल गर्ल के दलाल से दोस्ती थी और
महीने में एक दो बार उमा पंच-तारा होटल में चुदने जाती थी। मुझे वो बताती थी
कि उसके एक रात के दस हज़ार लगते हैं जिसमें से पाँच उसको मिल जाते थे और
ग्राहक टिप अलग से देता था। मुझे भी उसने चुदने के लिए कई बार कहा, लेकिन मैं
कभी चुदने नहीं गई। बाद में उमा की शादी एक कम्पनी के मैंनेजर से हो गई।
मुझे घर में रहते हुए 20-22 दिन हो गए थे, भाभी मुझसे चिढ़ने सी लगी थीं।
मैंने सोचा की दो दिन बाद मैं उमा के पास जाकर रह लूंगी। मेरी मौसी दो दिन के
लिए आ रही थीं।
मैंने उमा से कहा- मैं दो दिन बाद तेरे साथ आकर रहूंगी।
अगले दिन मेरी मौसी आ गईं पूरा दिन गपशप में चला गया। रात में मुझे भाभी के
कमरे में सोना पड़ा। मैं भाभी के कमरे में भाभी के साथ सोई। आदमी लोग अलग कमरे
में सोये। मौसी और माँ एक अलग कमरे में सोई थीं। अगले दिन भैया को सुबह टूर
पर जाना था, भाभी भन्ना सी रही थीं क्योंकि आज उन्हें बिना चुदे सोना था।
मुझसे एक दो बार बोली भी थीं कि तू बिना चुदे कैसे रह लेती है? मेरी तो चूत
एक दिन न चुदे तो खुजियाने लगती है। रात बारह बजे भाभी मुझसे बोली- प्यारी
ननद जी, आप एक घंटा छत पर टहल आओ, तब तक मैं इनसे से चुदवा लेती हूँ ! फिर तो
यह 5 दिन बाद वापस आयेंगे।
मुझे पहले से ही नींद नहीं आ रही थी, मैं बाहर छत पर टहलने चली गई। मौका
देखकर भाभी ने भैया को अंदर बुला लिया और अपनी चूत की सेवा करवाने लगीं।
थोड़ी देर बाद मैंने सीढ़ियों के पास मौसी और मौसा को कुछ फुसफुसाते देखा। मैं
चुप हो कर बातें सुनने लगी। मौसी मौसा का लंड पैंट से निकाल कर पकड़े हुए थीं
और कह रही थीं- कुत्ते, तेरा घोड़ा तो बड़ा टनटना रहा है लेकिन चूत में घुसते
ही पिचक जाता है। एक जमाना था कि एक एक घंटे तक मेरी सुरंग में हल्ला मचाता
रहता था।
मौसी की दोनों चूचियां खुली हुई थीं और पपीते की तरह लटक रही थीं। मौसा मौसी
की चूचियां मसल रहे थे, मौसी के चूचुक पर चुटकी काटते हुऐ मौसा बोले- कुतिया,
बहुत गाली दे रही है ? तेरी जवानी की आग भी तो बहुत बुझाई है इसने !
मौसी लंड को मसलते हुए बोलीं- अरे गाली क्यों दूँगी मेरे कुत्ते ! तेरे शेर
को तो मैं अब भी सबसे जयादा प्यार करती हूँ ! इधर ला जरा एक पप्पी तो लेने दे
इसकी !
इतना कह कर मौसी ने मौसा का लौड़ा मुँह में रख लिया और पूरी मस्त होकर चूसने
लगी। मैं हैरान थी कि पचास साल की मौसी भी लौड़ा चूस सकती हैं। मौसी मौसा की
गोदी में सर रखकर मस्ती से 5 मिनट तक लौड़ा चूसती रहीं, 55 साल के मौसा ने ५5
मिनट बाद रस छोड़ दिया, मौसी उसे अपने मुँह में गटक गई।
मौसा बोले- चल भाग चलें ! किसी बच्चे ने देख लिया तो क्या सोचेगा !
मैं 2-3 मिनट खड़ी यह सोचती रही कि पता नहीं लोग लौड़ा कैसे चूस लेते हैं ?
अगले दिन मौसी ने मुझे अकेले में पकड़ लिया और बोली- क्यों? रात को छिप कर
क्या देख रही थी? इतनी चूत में आग लग रही है तो आदमी से दूर क्यों रह रही है?
घर जा और चुदवा ! यह गन्दी बात होती है किसी को छिप कर देखना !
भाभी मुझसे चिढ़ी-चिढ़ी सी रह ही रही थीं, ऊपर से मौसी की बात से मेरा दिमाग
ख़राब सा हो रहा था। इन सबके बाद एक असली बात यह भी थी कि मेरी चूत में खुजली
भी जोरों की हो रही थी क्योंकि मेरे पति चूत तो मेरी रोज़ ही चोदा करते थे और
अब भाभी मौसी की चुदाई होते देखकर मेरी चूत रोज़ पानी छोड़ रही थी। मैंने
सोचा कुछ दिन उमा के पास जाकर रह आती हूँ।
उमा एक मस्त स्वभाव की लड़की थी कॉलेज के दिनों में उसने काल गर्ल बनकर, बॉय
फ्रेंड बनाकर कई बार कई लोगों से अपनी चूत को चुदवाया था। मेरी रूम मेट रही
थी, कई बार गर्मी में हम दोनों नंगी होकर सोती थीं इसलिए मुझमें और उसमे शर्म
की कोई बात नहीं थी। मेरी उससे अच्छी दोस्ती थी। रात को नौ बजे मैं उमा के घर
पहुँच गई। मुझे देखकर उमा खुश हो गई। हम दोनों ने खाना खाया, इसके बाद उमा
मेरी साड़ी उतार कर बोली- चल, आज नंगे सोते हैं ! तेरी सुहागरात और चुदाई की
कहानी भी तो मुझे सुननी है !
चूंकि पहले भी हम नंगी होकर सो चुकी थीं इसलिए रात को हम दोनों नंगी होकर सो
गईं।
उमा बोली- अब तो तेरी शर्म छुट गई होगी ! तीन महीने हो गए तेरी शादी को ! अब
तक तो सौ से ज्यादा बार चुद चुकी होगी? बोल, चुदने में मज़ा आता है या नहीं?
और वो मेरा चूत के होटों से खेलने लगी। मैंने कभी खुल कर अतुल से चूत नहीं
चुदवाई थी लेकिन रोज़ रात को अतुल जबरदस्ती मेरी चूत चोद देते थे। अब 20-25
दिन से मैं बाहर थी तो मुझे चूत की खुजली पता चल रही थी। मैं भी उमा की चूत
खुजाने लगी। थोड़ी देर में हम दोनों गर्म थीं, उमा बोली- खुजली ज्यादा हो रही
हो तो बोल ! धंधे पर चलते हैं ! नोट भी कमाएंगे और मौज भी लेंगे !
मैं बोली- नहीं बाबा ! नहीं ! मुझे तो बड़ा डर लगता है ! तू क्या शादी के बाद
भी धंधा करती है?
उमा बोली- भाई कभी कभी अब भी लगवा लेती हूँ ! पटी जब बाहर होते हैं ! एक रात
के पाँच हज़ार मिल जाते हैं और मज़ा भी आ जाता है। लेकिन सिर्फ अपने पुराने
यारों से लगवाती हूँ नहीं तो बदनाम हो जाऊंगी। मैं तो साली बदनाम हो गई थी
इसलिए तो 5000 रुपए कमाने वाले से शादी हुई नहीं तो तेरी तरह सॉफ्टवेयर
इंजिनियर से शादी होती ! चल यह छोड़, यह बता कितना मोटा लंड है तेरे पति का?
अभी नई नई शादी हुई है, 3-4 बार तो चूस ही लेती होगी एक दिन में ?
मैं हूँ हाँ करती रही ! मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि सब लौड़ा चूसने की
बातें क्यों करती हैं !
12 बजे के करीब मैं सो गई। रात को 3 बजे के करीब उमा का मोबाइल बजा। उमा ने
तुंरत काट दिया। मैं नींद में थी इसलिए मैंने ध्यान नहीं दिया। लेकिन दस मिनट
बाद उमा उठ कर गाउन पहन कर गई तो मैं चौंक गई। दबे पाँव मैंने पीछे जाकर देखा
तो मैं हैरान थी। उमा ने अपने फ्लैट का दरवाज़ा खोला, एक जवान सा लड़का अंदर
आया, उमा उसे दूसरे कमरे में ले गई और बोली- राजीव जी, पहले फीस निकालिए !
राजीव ने सौ के नोटों की गद्दी उमा के हाथ में रख दी। उमा मुस्करा दी, गद्दी
अलमारी में रख दी और राजीव की पैंट की चैन खोल दी। उसके बाद उसका लौड़ा निकाल
कर चूसने लगी। राजीव ने अपनी पैंट उतार दी। राजीव का लौड़ा सात इंच लम्बा और
तीन इंच मोटा होगा। पूरा लौड़ा लोहे की रॉड की तरह तना हुआ था और उमा लौड़ा लप
लप कर के चूस रही थी।
मैं छुप कर देखने लगी। कुछ देर में दोनों नंगे थे। राजीव उमा को पलंग पर लिटा
कर उसकी चूत चूसे जा रहा था, उमा की आह ऊह ओह की आवाजें कमरे में गूँज रही
थीं। मेरी चूत में जोरों की खुजली हो रही थी। होती भी क्यों नहीं ! आज मुझे
चुदे हुए पूरा एक महीना हो गया था।
उमा थोड़ी देर बाद चूत फ़ैला कर लेट गई। राजीव ने उसकी चूत में अपना सात इंच
लम्बा लंड ठोंक दिया और धक्के मरना शुरू कर दिया। उमा की चुदाई शुरू हो गई
थी। उमा जोर जोर से चिल्ला रही थी- उई ! बड़ा मजा आ रहा है ! और जोर से पेल
कुत्ते ! क्या चोदता है ! क्या मस्त लंड है ! महीने में एक बार तो आ जाया कर
! अगली बार से 10% छूट दूँगी साले ! हरामी क्या मस्त बजाता है ! और जोर से
पेल कुत्ते !
राजीव ने 15 मिनट तक उमा की चूत बजाई। उसके बाद उसका लंड खाली हो गया और उसने
लंड बाहर खींच लिया। उमा की चूत की प्यास शांत नहीं हुई थी, उसने राजीव को
जबरदस्ती अपनी तरफ खींच कर एक बार दुबारा उसका लंड अपने मुँह में डाल लिया और
चूसने लगी। मैं तो हैरान थी कि भाभी, मौसी उमा सब लंड चूसने में होशियार हैं
और मैं लण्ड चूसने को लेकर लड़ कर आ गई। मेरे मन में एक बार लण्ड चूसने का
ख्याल आया लेकिन अपने अहं के कारण मैं लंड नहीं चूसना चाहती थी और अतुल के
पास वापस नहीं जाना चाहती थी।
मेरी बुर उमा की चुदाई देखकर बुरी तरह गरम हो गई थी। मैं वापस आकर लेट गई कुछ
देर और चुदवाने के बाद उमा भी वापस आकर सो गई।
सुबह हम दोनों 12 बजे उठे। उमा बिल्कुल तरो-ताज़ा दिख रही थी। दिन में मुझसे
उमा बोली- चुदना हो तो बता दियो ! मेरे यारों की संख्या अभी कम नहीं हुई है


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मेरे पति

Posted On 00:33

मैं रीता हूँ मेरे पति का नाम अतुल है। मेरे पति चाहते हैं कि मैं उनका लौड़ा
चुसूं और पूरी नंगी होकर सेक्स में तरह तरह के खेल करूँ। इस बात को लेकर
अक्सर मेरी उनसे लड़ाई हो जाती थी। मुझे लौड़ा चूसने से बड़ी चिढ़ थी मुझे लौड़ा
चूसना बहुत गन्दा काम लगता था।
एक बार लड़ाई तेज हो गई, अतुल बोले- कुतिया, तू लौड़ा नहीं चूस सकती तो यहाँ से
भाग जा !
मैं भी लड़ कर अपने घर आ गई। मैंने अपनी माँ को बता दिया कि अब मैं घर नहीं
जाऊंगी। मेरी माँ ने मुझसे कुछ नहीं कहा। मेरे भैया 3-4 दिन के लिए घर से
बाहर थे इसलिए रात में मैं भाभी के कमरे में सोने चली गई।
मैं और भाभी रात को दस बजे बिस्तर पर आ गई। भाभी ने साड़ी उतार दी। वो अब
पेटीकोट और ब्लाउज़ में थीं। उन्होंने पेटीकोट उठा कर अपनी चड्डी भी उतार दी।
ब्रा वो पहने नहीं थीं। मैं एक मैक्सी और चड्डी पहने थी।
भाभी ने मुझसे पूछा- ब्लू फिल्म देखोगी क्या?
मैं पिछले दस दिन से नहीं चुदी थी, मेरी चूत में खुजली हो रही थी।
मैं बोली- देख लूंगी !
भाभी ने एक सेक्सी हिंदी ब्लू फिल्म लगा दी। फिल्म में कुछ देर बाद लड़कियों
ने लड़कों के लंड निकाल कर चूसना शुरू कर दिए।
मैं बोली- भाभी यह काम तो केवल रंडियां ही कर सकती हैं !
भाभी मुस्करा कर बोली- शुरू शुरू में तो गन्दा लगता है लेकिन एक बार चूस लो
तो फिर बार बार लंड चूसने का मन करता है ! तेरे भैया तो दिन में एक बार लंड
चुसवाते ही हैं।
मैं बोली- ऊहं ! मैं तो कभी नहीं चूस सकती !
कुछ देर बाद लड़की की चूत में लौड़ा घुसा कर लड़के चोदने लगे। कमरे में फिल्म की
सेक्सी आवाज़ गूँज रही थी। भाभी पेटीकोट उठा कर अपनी चूत सहलाने लगीं। मेरा
हाथ बार बार मेरी चूत पर जा रहा था लेकिन मैं हटा लेती थी।
भाभी मुस्करा कर मेरी तरफ देखती हुई बोलीं- शरमा क्यों रही है ? खुजली हो रही
है तो खुजा ले ! ला, मैं तेरी खुजा देती हूँ और तू मेरी खुजा दे !
भाभी ने मेरी मैक्सी खोल कर मेरी चड्डी में ऊँगली डाल दी और मेरी चूत खुजानी
शुरू कर दी। मेरा हाथ उन्होंने अपनी चूत पर रख दिया। मैं भी उनकी चूत खुजलाने
लगी। ब्लू फिल्म अपनी चरम सीमा पर थी। अब दो लड़कियों की चूत उन्हें सीधा
लेटाकर २ लड़के मार रहे थे और एक लड़का उनमें से एक लड़की को अपना लंड चुसवा
रहा था। उनकी उहं उहं ओह ओह की आवाजें पूरे कमरे में गूँज रही थीं।
मैं और भाभी बहुत गरम हो रहे थे, भाभी ने अपना पेटीकोट, ब्लाउज़ उतार दिया था।
मैं भी सेक्स की गर्मी में नहा रही थी और पूरी नंगी हो गई थी। भाभी की चूत
पूरी चिकनी थी। मेरी चूत पर झांटों का जंगल उग रहा था।
भाभी बोली- ननदजी, लगता है रमेश जी को जंगल में घुस कर चोदना अच्छा लगता है !
उन्होंने मेरी चूत में ऊँगली घुसा दी। मैंने भी उनके चूत के होटों को रगड़ना
जारी रखा।
फिल्म ख़त्म हो गई थी। हम दोनों पूरी नंगी एक दूसरे से बुरी तरह से चिपकी हुई
थी। मेरी चूत भाभी की चूत से पूरी छुल रही थी और चूचियां रगड़ खा रही थीं। हम
दोनों ने एक दूसरे के होंठ चूसे और चूचुक उमेठे। थोड़ी देर बाद भाभी और मैंने
एक साथ पानी छोड़ दिया उसके बाद हम दोनों सो गए।
अगली रात को हम लोग फिर साथ सोये। आज भाभी मेरे सामने पूरी नंगी हो गई थीं,
बोली- तेरे भैया के साथ तो मैं पूरी नंगी ही सोती हूँ ! अब कल तो हम लोगों ने
मौज की ही थी, आज और मौज करते हैं!
और उन्होंने मुझे भी पूरा नंगा करा दिया। मेरी झांटों के जंगल पर हाथ फिरा कर
भाभी बोलीं- चल, इसे साफ कर ले ! फिर मज़ा चखाती हूँ !
और उन्होंने क्रीम लगाकर मेरी चूत पूरी चिकनी कर दी। भाभी बोलीं- आज मैं तुझे
असली लंड जैसा मजा देती हूँ !
भाभी अपनी अलमारी की तरफ गईं, उन्होंने एक नकली लंड अपनी अलमारी से निकाला और
बोली- यह नकली लंड है ! बिल्कुल असली जैसा मज़ा देता है ! तेरे भैया ने
अमेरिका से लाकर दिया है। इसे चूत में फिट करके लड़कों की तरह औरतों को चोदा
जा सकता है और अपने हाथ से भी चूत में डाल कर मजा ले सकते हैं। अब बता मैं
तुझे चोदूँ या तू मुझे चोदेगी?
मैं बुरी तरह शरमा रही थी, भाभी बोली- बहुत शर्माती है? चल लेट ! पहले मैं ही
तुझे चोदती हूँ !
और उन्होंने अपनी चूत में लंड फिक्स कर लिया। भाभी नकली लंड लगा कर ऐसी लग
रहीं थीं जैसे कोई गोरे लंड वाला चिकना लौंडा मुझे चोदने को खड़ा है। मुझे
गिरा कर भाभी मेरे ऊपर लेट गईं और मेरी चूत में अपना नकली लौड़ा हाथ से पकड़ कर
घुसा दिया। नकली लंड मेरे पति से मोटा था, मेरे मुँह से ऊहऽऽ मर गई ! मर गई !
की आवाज़ निकल गई, लेकिन मुझे साथ ही साथ मज़ा भी आया था।
भाभी ने मेरी चूचियाँ मलते हुए करीब दस मिनट तक नकली लंड से मुझे चोदा। उसके
बाद उन्होंने मेरी चूत में लंड फिक्स कर दिया और बोली- चल अब तू मुझे चोद !
मैं चोदने में शरमा रही थी, भाभी बोली- साली शरमाती बहुत है !
और वो मेरे ऊपर उछ्ल कर बैठ गईं और ऊपर उछ्ल उछ्ल कर चुदने लगीं। उन्होंने
मेरे हाथ अपने बड़े बड़े संतरों पर रख लिए और बोलीं- कुतिया, इन्हें तो दबा दे !
मुझे उनके मोटे मोटे चूचे मसलने में बड़ा मज़ा आने लगा। थोड़ी देर में हम दोनों
झड़ गई। उसके बाद हम दोनों पहले की तरह चिपक कर सो गई।
रात के 3-4 बजे घर में घंटी बजी, भैया बाहर से आ गए थे। मैं भी जाग गई। भाभी,
मैं और भैया बातें करने लगे। थोड़ी देर में मैं सोने लगी। तभी मुझे ऐसा लगा
जैसे भाभी उठकर बाथरूम में गई हों। कुछ देर बाद मैंने बाथरूम में झाँककर देखा
तो मैं दंग रह गई- भाभी भैया का लंड पैंट से निकाल कर लपालप चूसे जा रही थीं।
उसके बाद इंग्लिश टॉयलेट पर बैठकर भैया ने अपने लौड़े पर भाभी को बिठा लिया और
कस कस कर उनकी चूचियों को मसलने लगे। भाभी धीरे धीरे चिल्ला रही थी- कुत्ते !
चूत में डाल इस लौड़े को ! 15 दिन से बिना चुदे पड़ी हूँ ! कोई और होती तो रंडी
बन गई होती ! भैया ने एक झटके में लंड भाभी की चूत में घुसा दिया और भाभी
चिल्ला उठीं- उईऽऽ ! मर गई ! फट गई ! मज़ा आ गया ! क्या घुसाया है !
भैया भाभी की घुन्डियाँ मसलते हुए बोले- रंडी, नकली लंड नहीं डाला अपनी चूत
में ? तुझे अमेरिका से लाकर दिया था !
लौड़े पर उछ्लती हुई भाभी बोली- अरे कुत्ते ! तेरे जैसे लंड का मज़ा नकली में
कहाँ ! साले को जब तक नहीं चखा था तब तक तो कोई बात नहीं लेकिन अब तो तीन दिन
नहीं चुदुं तो मन करने लगता है कि सब्जी वाले को बुलाकर चुदवा लूँ ! मेरे
कुत्ते, ज्यादा दिन को मत जाया कर ! अगर रंडी बन गई तो तू जिम्मेदार होगा..
भाभी उनके लौड़े पर धीरे धीरे उछ्ल रहीं थीं, भैया उनकी चूचियों की घुन्डियाँ
मसल रहे थे। भैया बोले- चल जरा हट थोड़ा ! तेरे को पीछे से ठोकता हूँ !
भैया ने भाभी को उठा दिया। भैया उठते, इससे पहले ही भाभी ने उन्हें रोका और
बोलीं- तेरा शेर बहुत सुंदर लग रहा है ! इसको थोड़ा चूस लूं !
यह कह कर उन्होंने भैया का लौड़ा अपने मुँह में ले लिया और तेजी से आगे पीछे
करके चूसने लगी। मैं हैरान थी कि मेरी भाभी इतना मस्त होकर लौड़ा चूसती हैं।
भाभी इस समय ब्लू फिल्म की हिरोइन लग रही थीं। भैया का सुपाड़ा ऐसे चाट रही
थीं जैसे कोई आइसक्रीम चाट रहा हो। भैया भाभी की गांड में ऊँगली कर रहे थे।
भैया बोले- चल कुतिया लौड़ा छोड़ और अब जरा चूत बजाने दे।
भाभी टॉयलेट की सीट पर हाथ रखकर घोड़ी बन गईं। भैया ने पीछे से उनकी चूत में
लंड छुला दिया और धीरे धीरे से उनके संतरे मसलते हुऐ लंड उनकी चूत में घुसा
दिया और भाभी को चोदने लगे। भाभी की ऊहं ऊह की आवाजें साफ़ सुनाई दे रही थीं।
भैया बीच बीच में जोर से हाथ उनके चूतड़ों पर मार देते थे। कुछ देर बाद भैया
ने अपना लंड बाहर निकाल लिया। लंड झड़ चुका था। भाभी खड़ी होकर भैया से चिपक
गईं और उन्हें चूमती हुई बोलीं- सच, आज बहुत मजा आया !
इसके बाद मैं बिस्तर पर आकर लेट गई थोड़ी देर में भाभी भी मेरे पास आकर सो
गईं। मैं सोच रही थी कि भाभी तो बहुत बदमाश हैं, लंड लपालप ऐसे चूसती हैं
जैसे आइसक्रीम खा रही हों ! छीः छीः कितना गन्दा काम है लंड चूसना ! चुदने
में तो मजा आता है लेकिन लंड चूसना ? छीः छीः. मैं तो कभी नहीं चूस सकती..


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मेरी चार सेक्सी टीचर

Posted On 00:32

बलात्कार जिससे आप सभी भली-भांति परिचित हैं ! आज तक बलात्कार केवल लड़कियों
का ही हुआ है लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि किसी लड़के का बलात्कार हुआ है !
यह कहानी भी मेरे बलात्कार से जुड़ी हुई है।

यह बात तब की है जब मैं कॉलेज में बी.एस.सी फ़ाइनल कर रहा था! मैं हमारी एक
गणित की मैम के घर ट्यूशन पढ़ने जाता था। वो मैडम दिखने में बहुत ही ज्यादा
सुन्दर थी तथा उनकी उम्र यही कोई 35-36 साल होगी। मेरी परीक्षा निकट आ रही
थी, एक दिन मुझे गणित में कुछ परेशानी आई तो मैंने सोचा कि क्यों न मैडम के
पास चला जाये !

सो मैं दोपहर के समय मैडम के घर चल दिया। वैसे तो अक्सर मैडम के घर कोई नहीं
रहता ! मैडम के पति भी एक बहुत बड़ी कम्पनी में काम करते है तथा घर पर महीने
दो महीने में एक बार आते हैं।

मैं मैडम के घर जाकर घंटी बजाने वाला ही था कि मैंने सोचा की पहले अन्दर देख
तो लूँ कि अन्दर कौन-कौन है !

तो मैंने चाबी वाले छेद से देखा। मैंने देखा कि अन्दर दूसरे कॉलेज की तीन
मैडम और बैठी हुई है! फ़िर मैंने देखा कि मेरी वाली मैडम ने टी.वी. ऑन करके एक
सी.डी. चला दी। मैंने कुछ देर और ध्यान लगाये रखा तो मैंने देखा वो अश्लील
वीडियो थी! मैं भी आँख लगाकर उन्हें देखने लगा। तभी मैंने देखा कि चारों
मैडमों ने अपनी अपनी कमीज़ तथा ब्रा उतार दी तथा वे एक दूसरे के बोबों को
दबाने लगी, मुँह में लेकर चूसने लगी।

इससे मेरा लिंग भी काफी कड़क हो गया लेकिन मैं यह सब नहीं चाहता था, इसलिए
मैंने घंटी बजा दी। मेरा घंटी बजाना ही था कि सबने हड़बड़ाकर अपने-अपने कपड़े
पहन लिए तथा टी.वी. बंद कर दिया। सभी एकदम सामान्य हो गई, जैसे कुछ नहीं हुआ
है।

उसके बाद मेरी वाली मैडम ने आकर दरवाजा खोला, मैडम के दरवाजे खोलते ही मैंने
उन्हें नमस्ते किया। मैडम मुझे देखकर कुछ आश्चर्य-चकित सी हो गई!

मैंने मैडम से कहा- मैडम, मुझे गणित में कुछ प्रोब्लम है इसलिए मैं समझने
यहाँ आ गया।

मैडम बोली- चलो आओ अन्दर आ जाओ !

तभी मैडम ने मेरी पैंट की तरफ देखा, तो शायद वो समझ गई कि मैंने सब कुछ देख
लिया है। मैं मैडम के घर के अंदर जाकर सोफ़े पर बैठ गया। मैडम दरवाजा बंद करके
मेरे पास आई और बोली- तुम मेरे बैडरूम में बैठो क्योंकि यहाँ पर ये मैडम बैठी
हुई हैं, मैं अभी 5 मिनट में अंदर आती हूँ।

मैं मैडम के बैडरूम में जाकर अपनी पढ़ाई करने लगा, मैडम उन तीनों से कुछ बात
करने लग गई!

तभी मैडम मेरे कमरे में आ गई और मुझे पढ़ाने लगी।

फ़िर उनको पता नहीं क्या सूझा, उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपने वक्ष पर रख
लिया। तो मैंने गुस्से से मेरा हाथ हटा लया तथा मैडम से कहा- मैडम, आप यह
क्या कर रही हैं, आप मुझसे काफी बड़ी हैं !

मैडम मुझसे कहने लगी- अगर तुझे पढ़ना है तो मेरा यह काम भी करना पड़ेगा !

मैं कुछ सोच में पड़ गया तथा मैंने फैसला किया कि यह काम गलत है, इसलिए मैं
किताबें उठा कर बाहर जाने लगा।

तो मैंने देखा कि बाहर मुख्य-द्वार का ताला अन्दर से लगा हुआ है और बाहर जाने
के सभी दरबाजे बंद है। मैंने सोचा कि शायद मैडम ने अकेले की वजह से लगा दिए
होंगे।

मैंने मैडम से कहा- मैं जा रहा हूँ, दरवाजा खोल दो !

तभी बाकी तीनों मैडम पता नहीं कहां से मेरे सामने आ गई और मुझसे बोली- अभी से
कहाँ जा रहे हो?

तभी पीछे से मेरी मैडम ने मेरा मुँह पकड़ लया और बाकी तीनों मैडमों ने भी मुझे
पकड़ लिया, मुझे पकड़कर बैडरूम में ले गई।

मैं जोर जोर से कहने लगा- मैडम, यह क्या हो रहा है?

लेकिन उन चारों ने मेरी एक नहीं सुनी और मुझे ले जाकर बिस्तर पर पटक दया। एक
मैडम ने मेरे दोनों हाथ पकड़ लिए तथा एक मैडम ने मेरे दोनों पैर पकड़ लिए। अब
मैं उठ भी नहीं सकता था।तभी बची दोनों मैडमों में से एक तो मुझे चूमने लगी
तथा दूसरी मैडम मेरे कपड़े उतारने लगी तो मैं जोर जोर से चिल्लाने लगा। तो एक
मैडम रसोई में गई तथा चाकू लेकर आई, तब तक दूसरी मैडम ने मेरी पेंट उतार दी
थी।

तभी चाकू वाली मैडम आई और मेरे गाल पर तीन चार थप्पड़ लगा दिए। मैं जोर जोर से
चिल्लाने लगा तो एक मैडम वोली- अब तू चिल्लाया तो मैं तेरा लंड चाकू से काट
दूंगी ! उन्होंने मुझे चाकू दिखाते हुए कहा।

मैं बहुत ज्यादा डर गया और बिल्कुल चुप हो गया।

अब तक दूसरी मैडम ने मेरे पैंट और शर्ट उतार दए थे, अब मेरे शरीर पर केवल
चड्डी-बनियान ही थे, और ये मैडमो से उतर नहीं रहे थे।

तो चाकू वाली मैडम ने चाकू से मेरे चड्डी-बनियान काटकर अलग कर दिए। अब मैं
बिल्कुल नंगा चारों मैडमों के सामने था।

अब एक मैडम ने मेरी आँखों पर रुमाल बांध दिया, जिससे मुझे कुछ दिखाई भी नहीं
दे रहा था। अब मैं न तो उठ सकता था और न ही कुछ देख सकता था। थोड़ी देर बाद
मुझे ऐसा लगा कि कोई मेरे हाथ पैर बांध रहा है।

अब मैडम ने मेरे आँखों की पट्टी खोल दी तो मैंने देखा कि मैडमों ने मेरे हाथ
पैर रस्सी से बांधे हुए हैं।

मेरी वाली मैडम बोली- अरुण हम तुझे तेरी गलती की सजा दे रहे हैं।

मैंने कहा- मैडम मैंने क्या गलती की है?

दूसरी मैडम बोली- तूने हम चारों को छिपकर सेक्स करते हुए देखा, यह उसी की सजा
है !

इतना कहते ही चाकू वाली मैडम ने चाकू मेरे लंड पर रखते हुए कहा- अगर अब तूने
जरा सी भी बदमाशी की और हमारा कहना नहीं माना तो मैं तेरा लंड काट दूंगी !
इसलिए जैसा हम कहें वैसा ही करना !

अब मैं मरता, क्या ना करता ! उनकी बात मानने के लिए राजी हो गया। अब एक मैडम
मेरे होंठो पर अपने होंठ रखकर जोर जोर से चूमने लगी। मुझे ऐसा लगा कि जैसे वो
मैडम मेरा सारा थूक अपने अन्दर ले जाना चाहती हो !

दूसरी मैडम मेरे लंड को ऊपर नीचे करने लगी तथा कभी गोल गोल घुमाने लगी जैसे
की रई से छाछ बनती है। इससे मेरे लंड में तनाव पैदा हो गया। बाकी दोनों
मैडमों ने मेरे हाथ खोल दिए तथा दोनों मेरे दाएँ व बाएँ लेट गई और मेरा एक एक
हाथ पकड़कर अपने अपने स्तनों पर लगा कर मुझसे बोली- इनको जोर जोर से दबाओ !

सो मैं दोनों मैडमो के बोबों को जोर जोर से दबाने लगा। इस समय मैं चारो
मैडमों से घिरा हुआ था। एक मैडम मुझे किस पर किस किये जा रही थी, दूसरी मैडम
मेरा लंड हिला रही थी, बाकी दोनों मैडम अपने अपने बोब दबवा रही थी।

इस समय मेरा लंड भी बहुत ज्यादा कड़क हो गया था। अब चारों मैडम मेरे से दूर एक
साथ खड़ी हो गई। तभी एक मैडम ने दराज़ में से एक कंडोम निकाला, और मेरे लंड पर
पहना दिया। अब तीन मैडम बैडरूम से बाहर चली गई। अब बैडरूम में मैं और केवल
मेरी वाली मैडम ही रह गई थी। मेरी टांगें अभी भी बंधी हुई थी। पता नहीं जाने
मुझे क्यों एसा लगा कि मुझे मेरे बलात्कार में मजा आया, मजा ही नहीं बहुत मजा
आया।


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गौर फरमाए : कुछ बाते आपसे !

Posted On 00:31

आप या तो कुंवारी होंगी या फ़िर शादी शुदा
शादीशुदा हो तो ठीक है, कुंवारी होंगी तो 2 बातें होंगी,
या तो आप शादी करेंगी या नहीं।
शादी नहीं कि तो ठीक लेकिन अगर की तो 2 बातें होंगी,
या तो आपका पति ठरकी होगा या नहीं
ठरकी हुआ तो आपको चुदाई का मज़ा आयेगा लेकिन अगर ठरकी नहीं हुआ तो 2 बातें
होंगी
या तो आप एक ही बिस्तर पे सोयेंगे या अलग – अलग,
अलग से सोने का तो सवाल ही नहीं उठता और अगर एक ही बिस्तर पे होंगे तो 2
बातें होंगी।
या तो आप बिना चुदे ही सो जायेंगी या फ़िर पति को गालियां देंगी।
बिना चुदे तो नींद आयेगी नहीं और अगर मन में पति को गालियां देंगी तो 2 बातें
होंगी।
या तो आप अपने पति को छोड़ने की सोचेंगी या फ़िर किसी और से अपनी चूत मरवाने की।
एक साल से पहले तो तालाक तो होगा नहीं और अगर किसी और से चुदवाना हो तो 2
बातें होंगी।
या तो आप अपने किसी पुराने यार से चुदवायेंगी या किसी और से।
किसी और को तो ढूंढना पड़ेगा लेकिन अगर यार से चुदवाना होगा तो 2 बातें होंगी।
या तो उसकी शादी हो गयी होगी या नहीं,
कुंवारा होगा तो ठीक लेकिन अगर शादी शुदा होगा तो 2 बातें होंगी।
या तो वो आपको चोदेगा या नहीं।
चोद देगा तो आप खुश लेकिन अगर नहीं चोदेगा तो 2 बातें होंगी।
आपको या तो अपनी जवानी ऐसे ही गुज़ारनी होगी या फ़िर किसी को ढूंढना होगा जो
आपको चोद सके।
ऐसे जवानी बिताना मुश्किल है अगर किसी को ढूंढना हो तो 2 बातें होंगी।
या तो वो आपको चोद के खुश कर पायेगा या नहीं।
खुश किया तो ठीक लेकिन अगर खुश नहीं किया तो 2 बातें होंगी।
या तो आप को वो जैसा भी चोदे खुश रहना होगा या फ़िर किसी दूसरे के लंड को
ट्राई करना होगा।
उससे चुदवा के ही खुश रहना है तो पति के लंड में क्या बुराई है,
लेकिन अगर दूसरा लंड ट्राई किया तो 2 बातें होंगी।
या तो दूसरा लंड मस्त होगा या फ़िस,
मस्त हुआ इसकी क्या गारंटी लेकिन अगर फ़िस हुआ तो फ़िर एक और लंड ढूंढो।
अरे तो मेरी बात आपकी समझ में क्यों नही आती है--------
बार बार लंड ढूंढ रही हो और हर एक लंड फ़िसड्डी निकल रहे हैं।


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पड़ोस की लड़क

Posted On 00:30

हेलो दोस्तों मैं पहली बार कहानी लिख रहा हून इस साइट पर, मेरा नाम सॅंडी है
और मेरी एज २४ साल है. बात उन दिनों की है जब मैं बीए क्लास में था और एक
पड़ोस की लड़की मुझसे बहुत बहुत प्यार करती थी पर उसने कभी बताया नही और वो
भी मेरे साथ ही पढ़ती थी. उसके घर मैं जाता रहता था, एक बार रात में लाइट चली
गयी तो मैं उनके घर घूमने चला गया पर उनके घर बिल्कुल अंधेरा था तो मैने
आवाज़ लगाई की कोई है तो सामने से कोई आकर टकराया, तो पता लगा की वो वही
थी.अंधेरे में कुच्छ न दिखने के कारण मेरा हाथ उसके बूब पर टकरा गया पर उसने
कुच्छ नही बोला तब पता नही मुझे क्या होने लगा की मैने उसका हाथ पकड़ लिया और
बोला आर्ची मैं तुमसे प्यार करता हून तो वो मुझसे लिपट गयी और कहने लगी मैं
तो तुमसे बहुत पहले से प्यार करती हून पेर कभी हिम्मत नही हुए बताने की उसके
बाद मैने उसको गाल पर किस किया और बोला की मैं चलता हूँ तो उसने बोला की सब
लोग खाना खा कर घूमने गये है तुम थोड़ी देर रुक जाओ तो मैं उसके पास ही बेड
पर बैठ गया. वो मेरे हाथ को अपने हाट में पकड़े हुए थी तभी उसने अपना सिर
मेरे कंधे पर रख लिया तो मुझसे यहा नही गया और उसको स्मूच करने लगा और थोड़ी
ही देर में हम बाद पर लेट गये, मेरा हाथ उसके पेट पर था तो मैने तोड़ा और
नीचे किया तो पता लगा की उसने स्कर्ट पहनी हुई है तब मैं स्कर्ट के ऊपर से
हाथ घूमने लगा इतने में उसने मुझे बुरी तरह बाहों में भर लिया तो मे भी उसके
बूब दबाने लगा जो की अभी बहुत बड़े नही थे.ये मैं पहली बार कर रहा था तो इतना
पता भी नही था की कैसे करना होता है अब मुझसे रहा नही गया तो स्कर्ट के नीचे
से उसकी पैंटी निकल दी और अपनी पैंट की ज़िप खोल कर अपना लॅंड उसकी बिना बॉल
की चू पर रख दिया और अंदर डालने लगा तो वो बहुत ज़्यादा चिल्लाने लगी और बोली
प्लीज़ ज़्यादा मत डालो, और मुझे लग रहा था मेरा डिस्चार्ज होने वाला है तो
मैने बहुत तेज धक्का मारा तो मेरा आधा लॅंड अंदर चला गया और वो रो पड़ी उसके
बाद मैं आधा लॅंड ही अंदर बाहर करने तो वो थोड़ी शांत हुई फिर मैने एक एक और
तेज धक्का मारा तो वो दाँत दबाकर रोने लगी फिर मैने सोचा अब ज़्यादा नही और
मैने एक दो बार ही अंदर किया होगा की मेरा डिस्चार्ज हो गया और मैं खड़ा हो
गया तभी लाइट भी आ गयी तो मैने देखा उसकी स्कर्ट पर काफ़ी ब्लड लग गया था और
उसकी आँखें लाल हो गयी थी. मैने उसको सॉरी बोला तो वो रोने लगी और बोली सॉरी
तो मुझे बोलना चाहिए की मैं तुम्हारा सात नही दे पाई पर अगली बार तुम्हे कोई
दिक्कत नही होगी और हम पूरा एंजाय करेंगे. फिर एक दिन मैं उसको अपने दोस्त के
रूम पर ले गया जहाँ कोई नही रहता था और हमने टीन घंटे में चार बार किया पर उस
दिन मुझे पहली बार में दिक्कत हुई बात टीन बार बहुत देर तक और एंजाय के साथ
किया और वो बहुत खुश लग राग रही थी और उसने बताया उसका डिस्चर्ग तो अब भी हो
रहा है तब मुझे और भी खुशी हुई. उसके बाद तो मैं उसको महीने में ६०-७० बार
सेक्स करता था. अब उसकी शादी हो चुकी है और कभी कभी घर आती है तो सोचकर बहुत
अच्छा लगता है की हमने कभी जमकर सेक्स किया था. ईवन शादी के बाद भी मैने उसके
साथ सेक्स किया तो वो बोली तुम्हारे साथ सेक्स करने में मुझे बहुत ज़्यादा
मज़ा आता है


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कहानी अतीत की

Posted On 00:29

कहानी होती ही अतीत की है। समय का अनुमान पाठक स्वयं लगा सकते हैं। मैंने
अपने बचपन का अधिकतर समय अपनी बुआ के गाँव में बिताया, लेकिन पिछले तीन वर्श
से नहीं गया। उनका गाँव बहुत छोटा सा है, लेकिन हमारे फूफाजी वहाँ के
सम्मानीय व्यक्ति हैं। हमारी बुआ के यहां ससुर के समय की बनाई गई लखौरी ईटों
की पुरानी दो मंजिल की बड़ी सी हवेली है। गाँव के आधे से अधिक खेत और बाग
उन्हीं के हैं। लेकिन अब सन्नाटा रहता है। बुआ के तीन बेटे और चार बेटियाँ
हैं, अब वहाँ कोई भी नहीं रहता है। बेटे सभी कबके जाकर शहरों में बस गये।
तीनों लड़किया का भी विवाह के बाद यही हाल हुआ। सब अपने-अपने कार व्यापार में
इतने में इतने व्यस्त हो गये कि दबंग व्यक्तित्व की मालकिन हमारी बुआ अकेले
घुल-घुल कर समय से पहले ही बूढ़ी हो गयीं। फूफा का तो खैर इधर-उधर में समय कट
जाता, लेकिन हमारे चाचाओं और ताउओं में जो भी जाता अपनी बहन के अकेलेपन से
घबरा जाता। लोग समझाते भी कि जीजी बेटों के पास चली जाओ, लेकिन वह भला कहाँ
जाने वाली थीं! बड़ी मुष्किलों से मझिले भय्या के यहाँ जाकर मोतियाबिन्द का
आपरेशन करवाया और चली आयीं। मेरी सरदियों की छुट्टियाँ हुई तो अम्मा ने
जबरस्ती भेज दिया। जाकर एक महीने बुआ की सेवा कर आ।हालाकि मन तो नहीं हो रहा
था लेकिन इस वादे पर कि अगर मन लगा तो रुकूँगा नही तो दो-चार दिन में आ
जाऊँगा। पहुचाँ तो पता चला कि कल ही बुआ के नन्द की बेटी अमिता दीदी आयी हैं।
उन्हें मैंने बहुत पहले देखा था। जव वह किशोर थीं, लेकिन वह पूरी तरह बदली
गंभीर स्वभाव की एक समझदार लड़की थीं। आँखों पर चश्मा लग गया था। रंग गोरा था।
लम्बाई दरम्यानी थी। शरीर भरा-भरा था। संभवताः मुझे देखकर प्रसन्न हुईं। थोड़ा
चुप-चुप रहने वाली लगीं। काम के लिए सोलह सत्तरह साल की लड़की कमली थी। वह
फिरिंगी की तरह दौड़ती भागती मुझे देखकर बेमतलब ही मुस्कुराती रहती। बुआ ने
कहा कि यह पुराने आदमी राम लखन की बेटी है। शादी तो हो गयी है, लेकिन अभी
गौना नहीं हुआ है। दिन पाँच साल का बना है नहीं तो लखना इसे बिदा कर देता, यह
कहते हुए उन्होंने ऊपर वाले को धन्यवाद भी किया कि है तो मुँहजोर लेकिन कोई
बेटी क्या सेवा करेगी! मैंने यह भी ध्यान दिया कि वह जितना मुस्कुरा रही थी
उतना बोल भी रही थी। मैं कुछ संकोच भी कर रहा था, वह थी कि शाम तक लल्लू
भैय्या की ऐसी रट लगाने लगी कि जैसे मुझे कितने दिनों से जानती हो। कमली का
रंग तो साँवला था, लेकिन लम्बाई निकलती हुई थी। उसका अंग-अंग मानों बोलता हो।
साधरण से सवाल समीच पर उसकी चुन्नी रुकती ही नहीं थी। मैंने महसूस किया कि
उसे घर में मर्द के न रहने से ओढ़ने के आदत थी नहीं, इसलिए चुन्नी संभल नहीं
रही थी। अपनी चुन्नी में उलझते हुए एक बार मेरा मन हुआ कि लाओ उतार कर फेंक
दुँ! जैसे यह बात ध्यान में आयी तो एकाएक मेरा ध्यान उसके सीने पर चला गया।
हे राम! मैंने गौर किया तो शरीर में सनसनाहट सी हो गयी। सीने की जगह लग रहा
था जैसे दो कटोरे उलट कर रख दिये गये हों! उसकी छातियों के दाने तो इतने खड़े
थे, कि कपड़े के ऊपर साफ दिख रहे थे। ऐसे मैं क्या कोई भी उसे देखकर बेकाबू हो
जाय! यद्यपि मैं सीधा और ठीक-ठाक चरित्र का लड़का था, तबभी मेरा मन अजीब सा हो
गया। मैं पिछले तीन साल से हास्टल में रह रहा था। वहाँ मैंने दो-तीन बार नंगी
पिक्चरें भी देखी थीं और कुछ दिनों सें अधनंगी पिक्चरों की शहर के सिनेमा
हालों में तो बाढ़ सी आ गयी थी। मैं जिन बातों से गाँव में अनभिज्ञ था वह सब
मुझे पता चल गयी थीं। जब भी मैं छुट्टियों के बाद गाँव से लौटता तो सहपाठी
खुले शब्दों में अपनी चुदाई की कहानियां बताते और मेरी भी पूछते, चूँकि मेरी
कोई कहानी होती नहीं, फिर मुझे अपने आप पर क्रोध आता हर बार कुछ करने का
इरादा लेकर जाता, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगती। हस्त मैथुन जैसी स्वाभाविक
गतिविधि ही मेरी काम भावना को शांत करने का एकमात्र साधन थी. लेकिन कमली को
देखते ही मैंने मन बना लिया कि चाहे मुझे यहाँ पूरी छुट्टियाँ ही यहाँ क्यों
न बितानी पड़ जाये, इसे लिए बिना नहीं जाऊँगा। मैंने इसी भावना से संचालित
आते-जाते दो-तीन बार उसके शरीर से अपने शरीर को स्पर्श किया तो उसने बजाय
बचने के अपनी तरफ से एक धक्का देकर जवाब दिया। शाम में चूँकि सर्दी थी इस लिए
दिल ढलते बुआ ने आँगन से लगे बरामदे में अलाव की सिगड़ी जलवा दी तो
मुहल्ले-पड़ोस की दो तीन औरतें आकर बैठ गयीं। कमली भी थी। अमिता दीदी भी थीं।
बरामदे को एक किनारे दीवार बनाकर ढक दिया गया था। बुआ सरदी और बरसात वहीं
सोतीं। बताने लगीं कि इधर काफी दिनों से कमली की माँ आजाती थी, लेकिन अमिता
के आने के बाद कमली सोने लगी। उनक बिस्तर वहीं लगा था। कुछ देर बाद लाइट चली
गयी। अमिता दी उठकर बिस्तर पर बैठ गयीं। वह चुप थीं। यद्यपि उन्होंने मुझसे
दिन में वह पढ़ाई-लिखाई की की थीं। इधर आग के पास औरतों की गप चल रही थी मै
उठकर सोने के लिए बाहर बैठक में जाने लगा तो बुआ ने ही रोक लिया। जाना कहकर।
वास्तव में उन्होंने अभी तक अपने पीहर की तो बात ही नहीं की थी। उनके कहने पर
मैं भी वहीं जाकर चारपाई पर दूसरी तरफ रजाई ओढ़कर बैठ गया। अमिता दी पीठ को
दीवार से टिकाये बैठी हुई औरतों के प्रस्नों का उत्तर हाँ-न में दे रही थीं।
मैंने पैर फैलाये तो मेरे पैरों का पंजा उनकी जांघों से छू गया। मैंने उन्हें
खींचकर थोड़ा हटाकर फिर फैलाया तो जाकर उनकी योनि से मेरा अँगूठा लग गया। असल
में उन्होंने अपने दोनों पैरों को इधर उधर करके लम्बा कर रक्खा था। उन्होंने
कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। न जाने किस भावना से संचालित होकर मैंने पैरों का
दबाव थोड़ा बढ़ा दिया। इस बार उन्होंने मेरे पैर के अँगूठे को पकड़कर धीरे से
हटाया तो वह उनकी एक तरफ की जाघ से लग गया। एक क्षण बाद मैंने फिर पैरों को
उसी जगह जान-बूझकर रख दिया। रजाई के अन्दर ही अमिता दी ने फिर मेरे पैर का
अँगूठा पकड़ लिया, लेकिन मैंने जब अपने पैर को वहाँ से हटाना चाहा तो उन्होंने
मेरी आशा के विपरीत उसी जगह पर मेरे पैरों को दबाये तेज चिकोटी काटने लगीं।
मैंने उनके चेहरे को देखा तो वह मुस्कुराये जा रही थीं। वह आगे आकर मेरे पंजे
को अपनी योनि को और सटाकर मुस्कुराते हुए मेरे पंजे को ऐंठ भी रही थीं।
यद्यपि वह जितना जोर लगा रही थीं मुझे उतनी पीड़ा की अनुभूति नहीं हो रही थी।
बल्कि मैं उनकी योनि के भूगोल को परखने में लग गया। संभवता वह शलवार के नीचे
चड्डी नहीं पहने थीं। क्योंकि उनके वहाँ के बालों का मुझे पूरा एहसास हो रहा
था। निश्चित रूप से उनकी झाँटो के बाल बड़े और घने होंगे। इस अनुभूति से मेरे
अन्दर अजीब सी अकड़न होने लगी। वहीं बैठी किसी औरत ने कहा, सो जाओ बबुआ।हाँ रे
ललुआ! बेचारा थका आया है। इसके फूफा की तो अभी बैठक में पंचायत चल रही होगी।
कल से इसका बिछौना अन्दर ही लगवाऊँगी। बुआ ने कहा, गुड्डी जरा किनारे हो जा
लल्लू कमर सीधी कर ले। बुआ अमिता को गुड्डी कहती थीं।न जाने कमली मुझे देखकर
मुस्कुराये जा रही थी। बिजली चली गयी थी। गाँव में रहती ही कितनी है! लालटेन
के मद्धिम प्रकाश में मैंने अमिता दी के चेहरे को देखने की कोशिश की, लेकिन
उनके भावों को समझ नहीं पाया। वह बिस्तर से उठने लगीं तो बुआ बोलीं, तू क्यों
उठ रही है गुड्डी, अभी यह तो चला ही जायेगा। और बाहर की तरफ के कमरे की ओर
संकेत करके कहा, आज से मैंने कमली को भी रोक लिया है।वह थोड़ा सा एक तरफ खिसक
कर बैठी रहीं। मैं जाकर उनकी बगल में लेट गया। और दो ही मिनट बाद अन्दर ही
हाथ को उनकी जँघों पर रख दिया वह थोड़ा कुनमुनाईं और मेरे हाथों को पकड़ लिया
पता नहीं क्यों वहाँ से हटाने के लिए या किसी इशारे के लिए लेकिन मैने उनके
हाथों को अपने हाथों में दबोचकर सहलाने लगा। फिर मैंने हाथों को अन्दर से ही
उनके सीने की तरफ लेजाकर उनके स्वेटर के ऊपर से छू दिया। सीने का ऊपरी हिस्सा
रजाई के बाहर था इसलिए जितना अन्दर था उसके स्पर्श का आनन्द मैं लेने लगा।
उनकी चूचियाँ ब्रेसरी मे कसी थीं। वह खाली हिल-डुल ही रही थीं। एकाधबार
उन्होंने मेंरा हाथ अपने हाथ से झिटकना चाहा तो मैंने उनके प्रतिरोध को
अनदेखा कर दिया। मुझे लगा कि यह उनका दिखावा है। फिर मैंने नीचे से हाथ को
कपड़े के अन्दर से डालकर सीधे हाथों को ब्रेसरी में बंधी छातियों के निचले
हिस्से से लगा दिया और जोरभर के सहलाने लगा। मन तो हो रहा था कि हाथों को ऊपर
लेजाकर पूरी छातियों को सहलाऊँ, लेकिन भय था कि कहीं कोई देख न ले। मुझे लग
रहा था कि कमली संभवतः अनुमान लगा रही है। मैंने महसूस किया कि उनकी चूचियां
कड़ी हो रही हैं। तभी उन्होंने रजाई को खींचकर गले तक ओढ़ लिया। फिर तो मुझे
मानों मनचाही वस्तु मिल गयी। मैंने हाथ निकालकर उनके स्वेटर के बटन खोल दिए
और उनकी जम्पर को ऊपर सरकार रजाई के नीचे उनकी चूचियों को खोल दिया उनके ऊपर
सिर्फ ब्रेसरी ही रह गयी। और मैं उनकी बदल-बदलकर दोनों छातियों को मलने-दबाने
लगा। वह कड़ी ही होती जा रही थीं। तभी वहाँ बैठी एक औरत बात करते हुए उनकी
मम्मी और भाई बहनों का हाल पूछने लगी। वह गड़बड़ाने लगीं। मुझे मजा आने लगा।
मैं और जोर लगाकर उनकी चूचियां मसलने लगा। अनुमान किया तो लगा कि वह देसी
पपीते के आकार की हैं। फिर मैंने दूसरे हाथ को पीछे से लेजाकर उनकी ब्रेसरी
के हुक को खोल दिया। दुसरे हाथ से आगे से खींचा। ब्रेसरी ढीली होने के कारण
उनकी दोनों चूचियां अब आजाद हो गयी थीं। और मेरी हथेलियों में खेलने लगीं।
तभी मैंने महसूस किया कि उन्होंने मेरी तरफ वाला अपना हाथधीरे से मेरे सीने
पर रख दिया। मैंने उनके फैले पैरों को अपने हाथ से खींचकर अपनी टांगों से
चिपका लिया। मैंने लुंगी ही पहन रक्खा था। उसके नीचे चड्डी थी। मेरा खड़ा होकर
तन गया लिंग उनकी फिल्लियों से रगड़ने लगा। वह अपने हाथों को मेरे सीने पर
फेरने लगीं। यूँ ही लगभगआधे घंटे बीत गये। मैंने हाथों को उनकी छातियों से
हटाकर जब दोंनों टांगों के बीच लेजाकर उनकी झाँटों से आच्छादित योनि पर कपड़े
के ऊपर से लगया तो देखा कि वहाँ का कपड़ा गीला है। तभी वहाँ रह गयी अन्तिम
दोनों औरतें यह कहते हुए उठ गयीं कि अब ठकुराइन हम सोने जा रहे हैं। अमिता दी
जल्दी से कपड़े सही किये। ब्रेसरी तो खुली ही रह गयी। उठ गयीं। मुझे भी मन मार
कर उठना पड़ा। मेरा लंड अभी भी उसी तरह तना था। किसी तरह संभालकर उठा।बाहर
बैठक में ही मेरा बिस्तर बिछा था। वहां अभी भी तीन चार लोग बैठे थे। गप्प चल
रही थी। बिस्तर पर रजाई नहीं थी तो मैं अन्दर लेने आया। बिस्तर को बक्सा ऊपर
छत की कोठरी में था। बुआ ने बड़बड़ाते हुए कमली से कहा, जाकर निकाल दे। और
मुझसे बोलीं, कि तू भी चला जा लालटेन दिखा दे।आगे-आगे मैं और पीछे कमली, ऊपर
पहुँचकर कोठरी का द्वार खोलकर बड़े वाले बक्से का ढक्कन खोलने के लिए वह जैसे
ही झुकी मैंने लालटेन जमीन पर रखकर उसे पीछे अपनी बाहों में समेट लिया। अमिता
दीदी के साथ इतनी हरकत के बाद तो मेरी धड़क खुल ही गयी थी। वह चैकी तब तक हाथ
को आगे से उसकी लेकर उसे अपनी बाहों में ले लिया और उसकी चूचियों को हथेलियों
की अँजुरी बनाकर उसे कस लिया और उसके कानों को होंठों मे दबाकर चूसने लगा।
उसने पकड़ से आजाद होने का प्रयत्न किया, लेकिन मैंने इतनी जोर से कसा कि वह
हिल भी नहीं सकती थी वह घबराकर बोली, लल्लू भय्या छोड़िये अभी कोई आ
जायेगा।उसकी यह बात सुनकर मेरा मन गदगद हो गया। मैंने उसकी चूची के चने को दो
अँगुलियों से छेड़ते हुए कहा, यहाँ कौन आने वाला है मैं तुम्हारी ले तो रहा
नहीं हूँ। बस मीज ही रहा हूँ।अब तक वह संभवतः अपने ऊपर नियन्त्रण कर चुकी थी।
बोली, हाय राम तुम तो बड़े हरामी हो! जो भी कहो। मैंने उसे झटके अपनी तरफ
घुमाकर चप्प से उसके मुँह को अपने मुँह में लेकर होठों को चूसने लगा और उसकी
समीच में हाथ डालकर चूचियों को सीधे स्पर्श करने लगा। धीरे-धीरे वह पस्त सी
पड़ने लगी। वह मस्ताने लगी। उसकी स्तन के चने खड़े होन लगे। जब उसके मुँह को
चूसने के बाद अपने मुँह को हटाया तो मादक स्वर में बोली कि, अब छोड़िये मुझे
डर लग रहा है। देर भी हो रही है।एक वादा करो।क्या देने का!उसने चंचल स्वर में
फिर सवाल किया, क्याबुर और क्याउसने अँगूठे के संकेत से कहा, ठेंगा।मैंने हाथ
को झटके से नीचे लेजाकर उसकी बुर को दबोचते हुए कहा, ठेंगा नहीं यह! तुम्हारी
रानी को माँग रहा हं।मेरे नीचे से हाथ हटाते ही उसने बक्सा खोलकर रजाई
निकालकर कहा, उसका क्या करना हैचोदना है! वह रजाई को कंधे पर रख लपक कर मेरे
लंड को चड्डी के ऊपर से नोचते हुए बोली, अभी तो!नहीं कल! और वह नीचे चली गयी।
मैं भी जाकर बाहर बैठक मैं सोया। फूफा तो खर्राटे भरने लगे, लेकिन मुझे नीद
ही नहीं आ रही थी। अन्दर से प्रसन्नता की लहर सी उठ रही थी। एक साथ दो-दो
शिकार! हे राम! फिर दोनों को लेकर तरह-तरह की कल्पनाएं करते हुए न जाने कब
नीद आयी। जब आँख खुली तो पता चला कि सुबह के नौ बज गये हैं। चड्डी गीली लगी।
छूकर देखा तो पता चला कि मैं सपने में झड़ गया था। तभी अमिता दीदी आ गयीं।
उन्होंने मेरे उठने के बाद लुगी को थोड़ा सा गीला देखा तो मुस्कुराने लगीं। और
धीरे से कहा, यह क्या हो गया।मैंने भी उन्ही के स्वर में उत्तर दिया, रात में
आपको सपने में चोद रहा था। नाइटफाल हो गया।वह हाथों से मारने का संकेत करते
हुए निगाहें तरेरते अन्दर चली गयीं। सर्दी तो थी लेकिन धूप निकल आई थी। पता
चला कि कमली कामों को निपटाकर अपने बाप के साथ अपने खेतों पर चली गयी। मैं
नित्तक्रिया से निपटकर चाय पीने के बाद नाश्ता कर रहा था तो पास में ही आकर
अमिता दीदी बैठ गयीं। दूसरी तरफ रसोई में चूल्हे पर बैठी बुआ पूरी उतार रही
थीं। वहीं से बोलीं, अमिता तूं नहा धोकर तैयार हो जा। चलना बालेष्वर मन्दिर
आज स्नान है। महीने का दूसरा सोमवार है।वह जवाब देतीं उससे पहले ही मैंने
गिड़गिड़ाते हुए कहा, प्लीज अमिता दीदी न जाइए। कोई बहाना बना दीजिए। क्यों
धीरे से मुस्कुराकर कहा।मेरा मन बहुत हो रहा है।क्यामैंने झुँझलाकर कहा,
तुम्हें लेने का!मैं दे दूँगी!हाँ!आप को जाना नहीं है।तब वह बोलीं, मामी मेरी
तबियत ठीक नहीं। अकेले कैसे रहेगी।लल्लू तो है न!वह रुकने वाला है घर में!
हाँ बुआ मैं तो चला घूमने। मैंने उन्हें छेड़ते हुए कहा।मामी! फिर वह धीरे से
बोलीं, तो मै जाऊँ!प्लीज.प्लीज नहीं।चुपकर रे ललुआ! क्हाँ गाँव भागा जा रहा
है! मैं बारह बजे तक तो आ ही जाऊँगी तेरे फूफा तो निकल गये शहर। कमली का बाबू
का आज गन्ना कट रहा है नहीं तो मैं उसे ही रोक देती। मैं रात से ही देख रही
हूँ इसकी तबियत ठीक नहीं देर तक सोई नहीं। बुआ ने कहा। और अन्तिम पूरी कड़ाही
से निकालकर आँच को चूल्हे के अन्दर से खीच कर उठगयीं।बुआ के जाते ही मैंने
मुख्य द्वार की सांकल को बन्द किया और और अमिता दीदी का हाथ पकड़कर कमरे में
लेगया। बिजली थी। बल्ब जलाकर उन्हें लिपटा लिया। उन्होंने अपना चश्मा उतार कर
एक तरफ रख दिया। वह भी सहयोग करने लगीं। मेरे मुंह से मुंह लगाकर मेरी जीभ
चूसने लगीं। मैं उनके चूतड़ों की फांक में अंगुली धंसा कर उन्हे दबाने लगा।
मेंरा मुंह उनके थूक से भर गया। मेरा शरीर तनने लगा। वह चारपाई पर बैठ गयीं।
मैंने उनकी समीच को उतरना चाहा तो बोलीं, नहीं ऊपर कर लो।मजा नहीं आयेगा।
कहते हुए मैंने हाथों को ऊपर करके समीज उतार दी। ब्रेसरी में कसी उनकी छोटे
खरबूजे के आकार की चूचियां सामने आ गयीं। फिर मैंने थोड़ी देर उन्हें ऊपर से
सहलाने के बाद ब्रेजरी खोलना चाहा तो उन्होंने खुद ही पीछे से हुक खोल दिया।
बल्ल से उनकी दोनों गोरी-गोरी चूचियां बाहर आ गयीं। चने गुलाबी थे। थोड़ी सी
नीचे की तरफ ढलकी थीं। मैं झट से पीछे जाकर टांगे उनके कमर के दोनों तरफकरके
बैठ गया। और आगे से हाथ ले जाकर उनकी चूचियां मलने लगा। चने खड़े हो गये।
उन्हें दो अंगुलियों के बीच में लेकर छेड़ने बहुत मजा आ रहा था। मेरा पूरी तरह
खड़ा हो गया लिंग उनकी कमर में धंस रहा था। वह बोलीं, पीछे से क्या धंस रहा
हैअब इससे आगे नहीं!उनको अनसुना करके मैंने अपनी लुंगी खोल दी नीचे कुछ नहीं
था। चारपाई से उतर कर उनके सामने आ गया। मेरे पेड़ू पर काली-काली झांटे थीं।
पेल्हर नीचे लटक रहा था। चमड़े से ढका लाल सुपाड़ा बाहर निकल आया। उसे उनकी नाक
के पास हिलाते हुए कहा, अमिता दीदी इसे पकड़ो।उन्होंने लजाते हुए उसे पकड़ा और
सहलाने लगीं। थोड़ी ही देर में लगा कि मैं झड़ जाऊंगगा। मैंने तुरन्त उनकी
पीठपर हाथ रखकर उन्हें चित कर दिया और हाथ को द्यालवार के नारे पर रख दिया।
वह बोलीं, नहीं।मैंने उनकी बात नहीं सुनी और और उसके छोर को ढूंढने लगा। वह
बोलीं, आगे न बढ़ों मुझे डर लग रहा है। मैंने नारे का छोर ढूंढ लिया।वह फिर
बोलीं, अगर कहीं बच्चा ठहर गया तो। आज नहीं कल निरोध लाना।बुर मे नहीं
झड़ूंगा। कसम से । मैंने कहा।लल्लू मुझे डर लग रहा सच! यह मैं पहली बार करवा
रही हूं।मैं भी। इसी के साथ मैंने उनका नारा ढीला कर दिया और दूसरे हाथ से
उनकी चूचियां मले जा रहा था। वह ढीली पड़ती जा रही थीं। कुछ नहीं होगा। कहकर
मैंने सर्र से उनकी शलवार खींच दी। नीचे वह चड्डी नहीं पहने थीं। उनकी बुर
मेरे सामने आ गयीं। उन्होंने लज्जा से आं बंद कर लीं। उनका पेड़ू भी काली
झांटों से भरा था। मैंने ध्यान से देखा तो उनकी बुर का चना यानी क्लीटोरिस
रक्त से भरकर उभर गया दिखा। मैं सहलाने के लिए हाथ ले गया तो वह हल्का से
प्रतिरोध करने लगीं, लेकिन वह ऊपरी था। मुझसे अब बरदास्त नहीं हो रहाथा।
मैंनें जांघे फैला दी और उनके बीच में आ गया। फिर अमिता दीदी के ऊपर चढ़कर
हाथों से लन्ड पकड़कर उनकी बुर के छेद पर रक्खा और दबाव दिया तो सक से मेरा
लन्ड अन्दर चला गया। निशाना ठीक था। उन्होंनं सिसकारी भरी। और धीरे से कहा,
झिल्ली फट गयी।मैं कमर उठाकर हचर-हचर चोदने लगा। उन्होंने मुझे अपनी बाहों
में कस लिया और मेरे चेहरे पर अपने मुंह को रगड़ने लगीं।उनका गोरा नरम शरीर
मेरे सांवले थोड़ा भारी शरीर से दबा पिस रहा था। थोड़ी देर बाद उनकी बुर से
पुच्च-पुच्च का स्वर निकलने लगा। मैं झड़ने को हुआ तो झट से लन्ड को निकाल
दिया ओर भल्ल से वीर्य फेंक दिया। सारा वीर्य उनके शरीर पर गिर गया।थोड़ी देर
बाद वह उठ गयीं ओर वैसे ही कपड़े पहनने लगीं। मैंने कहा, एक बार और।नहीं!अब
कबकभी नहीं।यह पाप है! पाप नहीं मेरा लन्ड है। मैंने इस तरह कहा कि, वह
मुस्करा उठीं और कपड़े पहनने के बाद कहा, लल्लू सच बताओ इससे पहले किसी की
लिए हो।कभी नहीं। बस चूची दबाई है। वह भी यहीं।किसकी। उन्होंने आंखें खोलकर
पूछा। कमली की।कब। रात जब हम लोग ऊपर गये थे। तुम पहुँचे हो! वह बोलीं और
बाहर निकल गयीं।दोपहर तक बुआ क आने से पहले हम दोनों चूत बुर और लन्ड की
बातें करते-करते इतने खुल गये कि मैंने तो सोचा भी नहीं था। उन्होंनं बताया
कि उनके चाचा के लड़के ने कई बार जब वह सोलह की थीं तो चोदने की कोशिश की
लेकिन अवसर नहीं दिया। लेकिन मैंने रात में उनकी भावनाओं को जगा दिया और
अच्छा ही किया। क्यों की अभी तक वह इस स्वर्गीय आन्नद से वंचित थीं। चुदाई के
बाद हम लोगों ने मुख्य द्वार तुरन्त ही खोल दिया, तभी पड़ोस की एक औरत आ गयीं।
वह थोड़ी देर बैठी रहीं। मैं धूप में नहाने बाहर नल पर चला गया। वह भी जब
नहाकर आयीं तो बारह बनजे में आधे घंटे रह गये थे। इसका अर्थ था बुआ बस आने
वाली होंगीं। मैंनें एक बार ओर चोदने के लिए कहा तो वह नहीं मानी, लेकिन मेरे
जिद करने पर ठीक से वह अपनी बुर दिखाने के लिए तैयार हो गयीं। बुर को खोल
दिया। चुदाई के कारण अभी तक उनकी बुर हल्की सी उठी थी। मैंने झांट साफ करने
के लिए कहा तो हंसकर टाल गयीं। उन्होंने मेरा लन्ड भी खोलकर देखा। वह सिकुड़कर
छुहारा हो रहा था। लेकिन उनके स्पर्श से थोड़ी सी जान आने लगी तो वह पीछे हट
गयीं, और बोलीं कि, अब बाद में अभी यह फिर तैयार हो गया तो मेंरा मन भी तो
नहीं मानेगा!दोपहर में बुआ के साथ ही कमली भी आयी। वह हमे देखकर अकारण
मुस्कुराये जा रही थी। मैं गाँव घूमकर तीन बजे आया तो बाहरी बैठक में लेट
गया। वह धीरे से आकर बोली, आज तो अकेले थे, लल्लू भय्या अमिता दीदी को लिया
तो होगा।तूने दे दिया कि वह देंगीब! बता न कब देगी और कहाँ, कहकर मैंने इधर
उधर देखकर उसे वहीं बिस्तर पर गिरा दिया चढ़बैठा और लगा उसकी चूचियां कपड़े के
ऊपर से मीजने, वह भी मुझे नोच रही थी। तभी न जाने कैसे वहां अमिता दी आ गयीं।
चूंकि मकली नीचे थी इसलिए उसने उन्हें पहले देखा वह नीचे निकलकर भागने का
प्रयत्न करने लगी। मैं ओरतेजी से उसकी चूचियों को मसलते हुए उसे दबाने लगा तो
वह घबराये स्वर में बोली, अमिता दीदी! मैंने मुडकर देख तो न जाने क्यों मुझे
हंसी आ गयी। मनही में सोचा चली अच्छा हुआ। लेकिन मैंने घबराने का बहाना करके
कहा, अमिता दी किसी से कहना नहीं। वह हक्की बक्की हो गयीं। मैंने आंख मारी तो
समझ गयीं। तब तक हम दोनो अलग हो गये थे। वह आंखे नीचे झुकाकर खड़ी हो गयी और
बोली, लल्लू भय्या जबरदस्ती कर रहे थे।मैं एक शर्तपर किसी से नहीं कहूँगी। वह
मुझसे भी उतावली के साथ बोली। हां!जो मैं कहूंगी करना होगा। तुम मेरे सामने
लल्लू से करवाओगी।मुझे तो इसकी आषा भी नहीं थी। मैंने सिर झुकाकर हामी भर दी,
वह भी हल्का सा मुस्कुराई।हम लोग अन्दर आ गये। कमली काम में लग गयी। अमिता दी
ने अवसर मिलते ही धीरे से कहा, इसको भी मिला लेंगे तो मजा भी आयेगा और डर भी
नहीं रहेगा।


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सेक्सी हो तुम - कविता

Posted On 00:28

बहुत सेक्सी हो तुम, बहुत सेक्सी हो तुम!
कभी मैं जो कह दूं मोहब्बत है तुम से और तुम्हारी चूत से और नंगी छाती से!
तो मुझको खुदारा गलत मत समझना !
के मेरी जरुरत हो तुम, बहुत सेक्सी हो तुम !
है सेक्स की डाली, ये बाहें तुम्हारी !है खामोश जादू निगाहें तुम्हारी !
तुम्हारी छाती नंगी को अपनी बाँहों भर लूं !
चूसूं मैं आग से भी ज्यादा और स्वादिष्ट गरम चूत और गरम छाती इनसे तुम्हारी !
लंड मेरा ही चूत में डलवाना !
मेरे लंड और दिल को ठंडक पहुंचाना और किसी से मत छुवाना चूत अपनीके मेरी ही
अमानत हो तुम !
बहुत सेक्सी हो तुम !
है चूत तुम्हारी का रंग जैसे सुनहरा सुनहरा !
और उस पर ये काली गरम और सेक्सी छोटी जुल्फों का पेहरा !
वीर्य की खुशबू से नाजु़क महकता बदन है !
ये लब है तुम्हारा के खिलता चमन है !
बिखेरो जो जु़ल्फ़ें तुम्हारी चूत की तो खड़े हो जाये मेरे लंड के बादल !
ये ताहिर भी देखे तो हो जाये पागल !वो सेक्सी मुरत हो तुम !
बहुत सेक्सी हो तुम !.........


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शादीशुदा

Posted On 00:27

दोस्तो मुझे शुरू से ही शादीशुदा औरतो में दिलचस्पी ज़्यादा है। उसका कारण ये
है कि शादीशुदा औरतों का यौवन और उनके चेहरे पर शादी के बाद जो चमक नहोती है
उसे देखकर मेरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ जाती है तब मुझसे अपने लिंग पर
काबू ही नहीं किया जाता और मुझे हस्तमैथुन करके इसे शांत करना पड़ता है।
हालाँकि कॉलेज में टॉपर होने की वजह से कई लड़कियाँ मुझसे बड़ी इंप्रेस्ड हैं
पर उनके यौवन में मुझे वो बात नज़र नहीं आती जो एक विवाहित महिला के यौवन में
होती है। शादी के बाद नया नया संभोग के बाद उनके शरीर में एक अलग ही बदलाव आ
जाता है। उनके नितंबो में जो कसाव और शरीर में जो भराव आता है उसकी बात कुछ
अलग ही होती है अभी कुछ ही समय की बात है उस समय मेरे घर में नये किरायेदार
आए। उनकी शादी को अभी दो ही साल हुए थे और वो पति पत्नी दोनो वर्किंग थे।
राजेश एक मल्टिनॅशनल कंपनी में जॉब करते थे और रीता मेरे ही कॉलेज में
प्रोफेसर थी। दोनो कुछ ही समय पहले दिल्ली में आए थे इसलिए उन्हें नये घर की
तलाश थी। चूँकि क्लास में हमेशा टॉप करता था तो अक्सर मेरी रीता से
सब्जेक्ट्स को लेकर बात होती थी। एक दिन उन्होने मुझसे किराए का घर ढूँदने के
बारे में पूछा तो मैंने उन्हें अपने घर को किराए पर लेने के लिए कहा, उन्हें
घर पसंद आ गया, और वो कॉलेज के पास भी था इसलिए उन्होंने घर किराए पर ले
लिया। मैंने उनसे घर पर पढ़ना शुरू किया और जब उनको करीब बैठ कर देखा तो मैं
पागल हो गया। रीता के शरीर में जो बात थी क्या कहने, एक दम गोरा रंग, बिल्कुल
स्लिम बॉडी और खड़ी हुई चुचियाँ, कद करीब पाँच फुट सात इंच और खूबसूरती इतनी
कि किसी का भी जी ललचा जाए। मेरे साथ भी ऐसा ही हुआ। अब पढ़ाई में तो दिमाग़
ही नहीं लगता था।
मैंने अक्सर उनके करीब जाने के मौके तलाशने शुरू कर दिए। एक बार उनके पति
किसी काम से कुछ से कुछ दिनों के लिए बाहर गये तब मैंने रीता के करीब जाने के
और मौके तलाशने शुरू कर दिए। उनके बेडरूम की एक खिड़की उस रात को खुली थी।
मैंने करीब आधी रात के समय उसमें झाँक कर देखना शुरू किया क्योंकि तब तक मेरे
सब घर वाले सो चुके थे। रीता के कमरे में जो नज़ारा था उसे देखकर मैं पागल हो
गया। रीता अपने बेड पर नग्न अवस्था में लेती हुई थी और अपनी योनि को मसल कर
कर सिसकियाँ ले रही थी। मानो ऐसा लग रहा था कि कितने दिनों संभोग न किया हो।
मेरे हाथ मेरे लिंग का कड़ापन महसूस कर रहे थे और मैंने तभी वहीं हस्तमैथुन
किया। रात भर मुझे नींद नहीं आई। अगले दिन कॉलेज से जब मैं वापिस आया तो देखा
मेरे सब घर वाले कहीं बाहर गये हुए थे मैंने घर की चाबी के लिये रीता से पूछा
तो रीता अपने कमरे से बाहर आई और मुझे बोली कि चाबी तो नहीं है पर तब तक के
लिए तुम मेरे कमरे मे बैठ जाओ। उस समय उन्होंने भी कॉलेज से आकर चेंज ही किया
था तो उन्होंने शॉर्ट नाइटी डाली हुई थी। वो मेरे सामने ही सोफे पर बैठ गयी
और मुझसे बातें करनी लगी। बातें करते हुए मुझे ध्यान आया कि जिस तरह टांगे
खोल कर वो बैठी थी उनकी जांघें दिखाई दे रही थी। और ध्यान देने पर मैंने पाया
कि उन्होंने अंदर कुछ नहीं डाला हुआ था। मेरे लिंग पर मेरा काबू न रहा और वो
टन कर खड़ा हो गया। तभी उन्होंने मुझसे कहा कि रात को चोरों की खिड़की में
देखना ठीक नहीं। मैं घबरा गया कि इन्हें कैसे पता चला कल रात के बारे में।
रीता - ये ठीक नहीं है कोई और रात को तुम्हें हस्तमैथुन करते हुए देख लेता
तो, मैं जो भी कर रही थी अपने कमरे में कर रही थी, आगे से ध्यान रखना। मैने
थोड़ा झुक कर उनकी टांगों के बीच में देखना शुरू कर दिया। रीता - ये क्या कर
रहे हो। कहाँ देख रहे हो? मैंने कहा अब तो मैं कमरे के अंदर हूँ। रीता - बड़े
समझदार बनते हो। वो मेरे मंसूबे जान गयी थी।मैंने हिम्मत कर के उनकी टाँगो पर
हाथ रख दिया।रीता - बस टाँगो से ही प्यार है या आगे भी बढ़ना है। वो बोली -
अक्सर राजेश तो बाहर रहते हैं और मुझे अकेले रहना पड़ता है। उन्हें मेरे यौवन
की प्यास की कोई कदर नहीं है। इसलिए मुझे अकेलेपन में यूं सिसकना पड़ता है।
पर तुम्हें कल रात देख कर मुझे भी कुछ हो गया। कितना बड़ा लिंग है तुम्हारा।
लगता है बड़ी ब्लू फ़िल्में देखते हो और हस्तमैथुन कर कर के ऐसा लंबा कर लिया
है। मैं इसका स्वाद चखना चाहती हूं अब तो मेरे दिल की बात उन्होंने कह दी।
मैंने अपने दोनो हाथों से उनकी जाँघो को सहलाना शुरू कर दिया। साथ ही उनके
होंठो की ओर अपने होंठ बढ़ा दिए, हम एक दूसरे को काफ़ी देर तक किस करते रहे और
फिर मैं उनके साथ उनके बेडरूम में चला गया।रीता - मेरा यौवन देखना चाहोगे और
ये कहते ही उन्होंने अपनी नाइटी उतार दी। सच में शादीशुदा औरत के नग्न जिस्म
को मैं पहली बार देख रहा था और बेकाबू होकर मैंने उनके बूब्स चूसने शुरू कर
दिए। और वो और कसते चले हो गये और पूरी तरह खड़े हो गये।रीता - पहले कभी
संभोग किया है। मैंने कहा - नहीं।तो फिर तो तुम अभी कच्चे हो,,, ये कहते हुए
उन्होंने मेरी पैंट उतार दी मैंने अंडरवेर नहीं पहना था और मेरा एक बार
स्खलित भी हो गया था। गीली पैंट देख कर रीता बोली। रीता - बस इतने में ही झड़
गया। तो तुम क्या करोगे। मैंने कहा - पहली बार किसी शादीशुदा को नग्न देखकर
ये झड़ गया। अभी दस बार और झड़ सकता है। तब मैंने कहा - मुझे आपकी योनि देखनी
है। वो बेड पर लेट गयी और अपनी टांगे खोल दी। मैंने पहली बार किसी चूत को
देखा था मैंने सीधा उसे चाटना शुरू कर दिया । रीता - अरे बड़े बेकाबू हो। चलो
कोई बात नहीं। पहली बार तो ऐसा ही होता है। मैंने अपनी जीभ उनकी योनि में
फिरानी शुरू कर दी। वो सिसकने लगी। मैंने जीभ को और अंदर डालना शुरू कर
दिया।रीता - अरे ऐसे चूसोगे तो मैं झड़ जाउंगी। मैंने स्पीड थोड़ी कम कर दी
और उनके ऊपर आकर उनके बूब्स दबाने शुरू कर दिए। रीता - मुझे तुम्हारे लिंग का
टेस्ट करना है। मैंने कहा तो आ जाओ सिक्स नाइन की पोज़िशन में रीता - वो क्या
है। मैंने कहा - ब्लू फिल्म्स नहीं देखी क्या कभी। रीता - वो तो तुम किड्स
देखते हो। हम तो वो सब असली में करते हैं। और मैंने उनको सिक्स नाइन की
पोज़िशन में लाकर अपना लिंग उनके मुँह में डाल दिया और उनकी योनि चाटने लगा।
हम दोनो ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और मैंने देखा कि उनकी टाँगे कसती जा रही हैं
और एक दम उनकी योनि ने इतनी ज़ोर से मेरे मुँह पर अपना पानी झाड़ दिया कि
मेरा पूरा मुँह गीला हो गया। मैंने ऐसा पहले कभी ब्लू फिल्म्स में भी नहीं
देखा था।रीता - देखा लड़के इतना तुम्हारा दस बार में भी नहीं झड़ सकता जितना
हम एक बार में निकाल देते हैं। मैं बोला - इसके स्वाद में तो मज़ा आ गया और
कहा कि मेरा वीर्य भी तो चख कर देखो लो उन्होंने कहा - तो आ जाओ - पहले
उन्होंने मेरा लिंग अपने बूब्स में दबा कर ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया, मुझे
मज़ा आने लगा। मेरा लिंग और कड़ा हो गया। तब उन्होने मेरे सुपाड़े को अपने
मुँह में ले लिया। धीरे धीरे वो उसे पूरा निगलने लगी। मेरी उत्तेजना चरम पर
जाने लगी और बंदूक की तरह मैंने उनके मुँह के अंदर वीर्य की धार मार दी। रीता
- ये तो अमृत से भी ज़्यादा स्वाद है। मज़ा आ गया। पर अब मेरी प्यास कौन शांत
करेगा। तुम तो दो बार झड़ चुके हो।अब तो तुम्हारा खड़ा नहीं रहेगा ज़्यादा
देर। मैंने कहा - मैं तो अभी पहले की तरह ही हूं और कई बार और मूठ की धार
छोड़ सकता हूं। पर आपका नहीं पता, इतना ज़्यादा झाड़ा है आपने, अब भी है
उत्तेजना आपमें बाकी?रीता - औरत की प्यास को मर्द कभी समझे ही नहीं। मेरा
शरीर जल्दी हुई मशाल की तरह है। तुम जैसे लड़को के तो कई लंड ‍जला सकता
है।मैंने कहा - ऐसी बात तो आ जाओ एक बार और मेरे लंड की गिरफ़्त में।रीता -
काफ़ी जल्दी काफ़ी कुछ सीख रहे हो मैंने कहा - आपका स्टूडेंट हूं ना रीता -
आओ कितने दिनों से ये सील टूटी नहीं है आओ इसे तार - तार कर दो।मैने अपना
सूपाड़ा उनकी चूत पर रख दिया और धीरे धीरे उस पर फेरने लगा। रीता - तुम तो
मुझे जला दोगे। प्लीज़ अब अंदर डाल दो।मैंने ज़ोर लगाना शुरू किया पर मेरा
इतना मोटा और कड़ा था कि अंदर नहीं जा रहा था आसानी से। मैंने ज़ोर लगाया तो
उनकी चीख निकल गयी। पर लंड अंदर नहीं गया और चूत से खून निकालने लगा। रीता -
सही में तुम तो मर्द से कुछ ज़्यादा ही हो। खून निकाल दिया मेरी चूत से पर
अंदर नहीं गया। थोड़ी सा झाग लगा कर साबुन का फिर कोशिश करो। मैं बाथरूम से
साबुन का झाग ले कर आया और उसे लॅंड पर मसल लिया। अब मैंने ज़ोर लगाना शुरू
किया। रीता दर्द से चिल्लाने लगी और मैंने फिर पूरी ताक़त लगा कर एक ज़ोर का
झटका दिया और मेरा लंड चूत से खून के छींटे मेरे मुँह पर मारते हुए अंदर चला
गया। रीता की साँस गले में ही अटक गयी। रीता - बड़ा दर्द हो रहा है पर ऐसा
मज़ा भी कभी नहीं आया। अब तो मेरी चूत को जला दो एक दम।मैंने झटके बढ़ने शुरू
कर दिए। उनके मुँह से उउऊहह आअहह आआआअहह की आवाज़ें तेज आ गयी।रीता - और ज़ोर
से, और ज़ोर से, फाड़ दो मुझे और मेरी चूत को मैने झटके बढ़ाने शुरू कर दिए और
उनकी चूची चूसनी शुरु कर दी। उनकी उत्तेजना और बढ़ने लगी और तब मैंने ध्यान
दिया उनके बूब्स और कड़े हो गये तब मुझे लगने लगा कि अब ये झड़ने वाली है
मैने झटके तेज कर दिए और तभी मेरा झड़ गया पर मैंने झटके देने चालू रखे और वो
इतनी गरम हो गयी कि उनका भी झड़ गया मैंने उनके पानी को अपने मुँह पर मसल
लिया और हम दोनो ठंडे पड़ गये। मैं उनके साथ ही उनके बिस्तर पर लेटा रहा कुछ
देर तक उनके साथ चिपक कर। अभी भी हम दोनो अपने जिस्म की सिरहन महसूस कर रहे
थे। रीता - तुम्हारा वीर्य तो मेरी चूत मे अंदर चला गया, अगर मैं प्रेग्नेंट
हो गयी तो, मैंने कहा चिंता मत करो बाज़ार में कई गोलियाँ आती है जो ऐसा होने
पर भी प्रेग्नेन्सी रोक देती है।वो ले लेना और मैं फिर अपने कपड़े पहन कर
बाज़ार चला गया गोलियाँ लाने। अब ये सिलसिला कई दिनों तक चला।


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कमसिन कली

Posted On 00:26

प्यारे दोस्तों, ये मेरी पहली स्टोरी है, मेरा नाम संजय है। उम्मीद करता हूँ
कि आप सभी को पसंद आयेगी, अभी तक मैने जितनी स्टोरी पढ़ी हैं उनमें से कुछ
ज्यादा ही झूठी लगी, क्योंकि कोई भी लड़की किसी का लंड जल्दी से मुँह में नहीं
लेती है, अगर ले भी लेती है तो उसमें से जो वीर्य गिरता है उसे कोई चाटता
नहीं है।
छोड़िये इन बातों को, मैं अपनी स्टोरी की शुरुआत करता हूँ, ये स्टोरी करीब दो
साल पहले की है। एक दिन अचानक मेरे कोलेज के दोस्त का फोन आया। चूँकि कोलेज
मे हम अच्छे दोस्त थे, कोलेज खत्म होने के बाद हमारा सम्पर्क सिर्फ़ फोन पर
रहा, उसने कहा कि उसकी शादी फ़िक्स हो गई है और इसी महीने की 29 तारीख को है,
इसलिये हमें 3-4 दिन पहले ही वहाँ आना होगा क्योंकि शादी में काम कुछ ज्यादा
ही होता है, अच्छी दोस्ती के चलते मैं उसे न कहा न सका, मैने अपने ओफ़िस से
5-7 दिनो की छुट्टी ले ली। फ़िर मैं 26 तारीख को सुबह उसके घर पहुँचा। जब मैने
बेल बजायी तो कुछ देर बाद उसकी छोटी बहन ने दरवाजा खोला, वो मुझे जानती थी
लेकिन जब मैने उसे देखा तो देखता रह गया क्योंकि जब मैने उसे देखा था तो कुछ
बच्ची की तरह लगती थी, लेकिन अब उसे देख कर मैं हक्का बक्का रह गया जब मैने
उससे पूछा कि रिंकी तुम (उसका नाम रिंकी था) वो बोली हाँ पहचान लिये क्या,
मैने कहा कि तुम कितनी बड़ी हो गयी हो, फ़िर उसने कहा सारी बातें यहीं करेंगे
कि घर में भी आयेंगे। फ़िर हम घर में आ गये,
फ़िर मैने अपने दोस्त राजीव के बारे में पूछा तो वो बोली बस बाज़ार गये हैं आते
ही होंगे। क्योंकि उनके घर में राजीव, रिंकी और उनकी माँ ही रहती थी। फ़िर
उसने कहा कि ठीक है अब आप फ़्रेश हो जाईये मैं आप के लिये नाश्ता बना देती
हूँ। फ़िर मैं बाथरूम में चला गया लेकिन मेरे आंखों में रिंकी का फ़ीगर घूम रहा
था उसके बूब्स का साइज़ 34 उसकी फ़ीगर देख कर मेरा मन उसे चोदने का करने लगा,
लेकिन दोस्त की बहन थी इसलिये मन को मार कर बाथरूम में मुठ मार कर रह गया,
फ़िर थोड़ी देर में उसका भाई भी आ गया, फ़िर हमने साथ में ना_शता किया और फ़िर जो
काम था उनकी तैयारी में लग गये, इसी बीच में मेरा हाथ 2-3 बार रिंकी को टच
हुआ तो मैने सोरी कह दिया तो उसने कहा कि इसमें सोरी कि क्या बात है, लेकिन
मुझे ऐसा लगा कि फूल की फंखुड़ी का स्पर्श हुआ, मेरा मन बिचलित होने लगा। फ़िर
मैने जानबूझकर 1-2 बार उसके बूबस को टच किया तो उसने इग्नोर कर दिया। लेकिन
मेरा मन तो उसे चोदने को कर रहा था, फ़िर शादी के एक दिन पहले जब राजीव को
मेंहदी लग रही थी तब मैं वहीं था, मैने देखा कि रिंकी वहाँ नहीं है मैं फ़िर
उसके कमरे की तरफ़ गया तो वो कपड़े बदल रही थी और दरवाजा खुला हुआ था।
वो ब्रा पहन रही थी मैं दरवाजे पर ही रुक कर देखने लगा वो काली ब्रा थी। उसका
बदन देख कर मेरा लंड जिसकी लम्बाई करीब 8 इंच और 3 मोटा था एकदम खड़ा हो गया,
जब वो ड्रेस पहनकर आने लगी तो मुझे देख कर बोली कि आप कब आये मैने झूठ बोल
दिया की बस अभी अभी आया हूँ। लेकिन मुझे ऐसा लगा कि उसने शीशे में मुझे देख
लिया था। फ़िर वो मुस्कराते हुए चली गयी, फ़िर मैने हिम्मत कर सोचा कि अब इसे
मैं चोदकर ही रहुंगा, और फ़िर मैं भी राजीव के पास चला गया वहीं रिंकी के बगल
में जाकर बैठ गया और उसके हाथों सहलाने लगा। पहले तो उसने हाथ हटा लिया लेकिन
फ़िर थोड़ी देर बाद शायद उसे भी अच्छा लगने लगा। फ़िर धीरे धीरे रात होने लगी,
सब सोने जा रहे थे लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी इसलिये मैने रिंकी से रुकने
को कहा तो वह मान गयी। फ़िर हम बात करने लगे हँसी मज़ाक में मैने उसके गालों को
छुआ तो इतने कोमल थे कि बता नहीं सकता। अचानक उसने कहा कि एक बात पूचूं आप सच
बतायेंगे मैने कहा पूछो, उसने कहा आप सुबह जब मेरे कमरे में आये थे तब मैने
आप को देख लिया था तो आप ने मुझसे झूठ क्यो कहा, एक बार तो मैं शोक में आ गया
फ़िर कहा उस वक्त तुम जिस हाल में थी कि मैं बता नहीं सकता था इसलिये मैने झूठ
कहा, फ़िर मैने कहा कि तुम बहुत ही खूबसूरत हो तो वो शरमा गयी,
फ़िर मैने हिम्मत कर उसके होंठों को छुआ तो वह कांप गयी, वो बोली क्या कर हैं,
फ़िर मैने कहा कुछ नहीं बस यूंही तुम्हारे होंठों किस करने का मन कर रहा है,
वो कुछ नहीं बोली मैं समझ गया कि काम बन रहा है, मैने फ़िर उसे किस किया, उसके
होंठों में इतना रस था कि
मैं उसे चूसता रहा, फ़िर उसने अपने से अलग करते हुए कहा कि कोई आ जायेगा,
लेकिन मेरा मन तो उसे चोदने को कर रहा था। लेकिन एक बात
अच्छी थी कि मेरा रूम उसके रूम से सट कर था। फ़िर मैने कहा कि रात में रूम का
दरवाजा खोलकर रखना और वो मान गयी,
फ़िर मैन जब रात करीब 1 बजे उसके रूम में गया तो वो नाइट ड्रेस पहन रखी थी
उसमें तो और सेक्सी लग रही थी, मैने अन्दर जाकर रूम को लोक कर दिया और जाते
ही उसको किस करने लगा और उसे लेकर बेड पर गिरा दिया और उसकी ड्रेस खोलने लगा
तो वो बोली ये कर रहे हैं, मैने उससे कहा कि जरा रुको न अभी बताता हूँ, लेकिन
वो सब जानती थी आज उसकी चुदाई होने वाली है, साली जितनी भोली दिखती है उतनी
सयानी है। लड़कियां सब जानती हैं पता नहीं लड़कों को क्या समझती हैं, जब मैने
उसकी नाइटी उतारी तो उसके बूब्स पर काली ब्रा चमक रही थी, मैं ऊपर से उसके
बूब्स को दबाने लगा तो उसने कहा कि दर्द हो रहा है। जब मैने उसकी ब्रा उतारी
तो उसके बूब्स इतने स्वीट लग रहे थे कि मन कर रहा था कि खा जाऊं,
और फ़िर धीरे धीरे उसके बूब्स को सहलाने लगा एक हाथ से उसके बूब्स दबा रहा था
तो दूसरे हाथ से उसकी चूत, उसकी चूत पर हल्के हल्के बाल थे, फ़िर मैने उसकी
पैंटी भी उतार दी, अब वो बिल्कुल नंगी थी लेकिन इस बीच वो झड़ चुकी थी, उसकी
चूत से हल्का हल्का पानी निकल रहा था, फ़िर मैने भी अपने कपड़े उतार दिये और जब
मेरा लंड बाहर आया जो कि पैंट में खड़ा छटपटा रहा था बाहर आते हि एकदम लाल हो
चुका था। मेरे लंड को देख कर रिंकी ने आँख बंद कर ली, अब हम दोनो बिल्कुल
नंगे थे और अब मैं उसके होंठों को चौड़ा कर उसकी चूत को चूस रहा था उसकी चूत
एकदम टाइट थी जो कि बिल्कुल कुंवारी थी जब मैने अपनी जीभ उसकी चूत में डाली
तो उसके मुँह से आआआआअ......हाआअ
माआआआ......................निकल गया मैं समझ गया कि माल ताज़ा है सम्भाल कर
खाना होगा, फ़िर मैने उसे जोश में लाने लगा मैने उसको अपना लंड दिया कि मुँह
में ले लेकिन नहीं ले रही थी, लेकिन जब मैने जबरदस्ती की तो उसने किस किया और
निकाल दिया, मैने ज्यादा जोर नहीं दिया कहीं काम बिगड़ न जाये, फ़िर वो गरम हो
रही थी फ़िर मैने उससे कहा कि ओयल या क्रीम है तो लाना। तब वो ओयल ले आई। थोड़ा
सा तेल मैने अपने लंड पे लगाया और उसके चूत में लगाया,
फ़िर मैने अपने लंड का सुपाड़ा उसकी चूत के मुँह में रखा तो वह उठ बैठी और बोली
प्लीज़ दर्द होने लगा फ़िर मैने कहा कि कोई बात नही अभी दर्द कम हो जाता है फ़िर
मैं उसे किस करने लगा और उसी बीच में अपना लंड से उसके चूत में धक्का मारा तो
वो चीख पड़ी मा...................मा .......................मर
गयीईईईईईईईईई............................लेकिन उसकी चीख मेरे होंठों से दबी
रही लेकिन मेरा लंड अभि 2 इंच ही घुसा था फ़िर मैं उसकी चूची को सहलाने लगा और
उसके होंठों को किस करता रहा जब उसका दर्द कम हुआ तो अपने लंड को अन्दर बाहर
करने लगा अब रिंकी भी मेरा साथ देने लगी उसी में मैने एक और झटका मारा तो वो
दर्द से कँहर उठी और मर गयीईईईईईईईईईईईईईईईईइ रे मार डालल्लल्लल्लल्लला रे
ईईईईईईईईईबोलने लगी और मैं उसी तरह पड़ा रहा और फ़िर उसके होंठों को चूसता
रहा,,,,,,,,,,,,,
थोड़ी देर बाद रिंकी ने कहा की मुझे नहीं पता था कि तुम्हारा लंड इतना बड़ा है
मैं तो एकदम मर गयी बहुत दर्द हो रहा है मैने कहा कि मेरी रानी अभी तो दर्द
हो रहा है कुछ देर में तो तुम्हे मुझसे ज्यादा मज़ा आयेगा और मैं अपने लंड को
अन्दर बाहर करने लगा और रिंकी भी जोश में आ कर अपनी कमर तो उठाने लगी उसे भी
मज़ा आने लगा और वो जोर जोर से अपनी कमर उठाने लगी मैं समझ गया कि अब इसे
जवानी का मज़ा आ रहा है और वो बोली मेरे राजा अब तुम अपना पूरा लंड मेरी चूत
में डाल दो मैं तैयार हूं और मैने एक जोर का झटका मारा कि वो दर्द के मारे
चीख उठी और मैं उसे यूं ही चोदता रहा और मैने देखा कि उसकी चूत से ब्लड निकल
रहा है मैं जानता था कि इसकी ये पहली चुदाई है इसलिये होना ही था और मैं उसे
चोदता रहा इसी बीच वो 2-3 बार झड़ चुकी थी और उसकी चूत एकदम गीली हो चुकी थी
जिससे कि मेरा लंड आराम से अन्दर बाहर हो रहा था और अब उसका दर्द भी कम हो
गया था और हम दोनो जवानी का असली मज़ा ले रहे थे।
थोड़ी देर में मैं भी झड़ने वाला था इतने में वो बोली और जोर से चोदो मेरे राजा
अब मैं झड़ने वाली हूँ और मैं जोर जोर से धक्के मारने लगा और वो झड़ गयी और
थोड़ी देर में मैं भी झड़ गया मेरी इतनी हिम्मत नही थी कि मैं अपना लंड निकाल
कर बाहर झड़ जाऊं और मैं उसके ऊपर उसके होंठों को चूसते हुए उसके चूत में झड़
गया और इस तरह मैने उसे उस रात दो बार चोदा और फ़िर दूसरे दिन की कहानी अगली
बार में


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