मेरे नंदोई


12:44 |

आज मैं आपको जो कहानी बताने जा रही हूँ वो कहानी मेरे नंदोई (पती के बहनोई)
की है,

मेरे पती सिरफ एक भाई बहन हैं, बहन बरी है और मेरे पति से ५ साल बड़ी है, वो
देल्ही मई रहती हैं, वो काफी खुबसुरत है लेकीन मेरे नंदोई उन्सेय भी सुंदर
हैं, वय तागरे बदन के स्मार्ट मर्द हैं, वो स्वभाव से भी काफी मजाकीय हैं,
मेरा रिश्ता तो वैसे भी उन्केय साथ हंसी मज़ाक का है ऐअस लीये वय सब्केय
सामने ही मेरे साथ हंसी मज़ाक और प्यारी छेर-छार कीया कर्तेय हैं, लेकिन
धीरेय धीरेय मैं ये महसूस कर्नेलागी की जीजा जी यानी की मेरे नंदोई की भावना
मेरे प्रति ठीक नही है, कई बार मैं अकेली होती तो कभी मेरी क़मर पेर chikoti
काट लेते या कभी मेरे गलों को चूम लेते, उनकी ये हरकतें मुझेय बहुत अच्ही
लगती लेकीन बुरा मानने का नाटक करती,

उनको मन से मना करने का तो सवाल ही नही उठाता था, एक बार होली मे वय हमारेय
यहाँ आये हुवे थे, होली तो वैसे भी मस्ती का त्यौहार है और जीजा और सह्लाज के
बीच तो काफी खुल केर होली होती है, वैसा ही माहौल मेरी ससुराल मे था, मेरी
ननद तथा पति तों थोरी देर रंग खेल केर शांत बैठ गए लेकिन जीजाजी तो मेरे
पीचेय ही पर गए, मुझेय रंगों से दर लगता है एअस लीए नंदोई जी मेरे ऊपर रंग
डालने के लीये लपके, वैसे ही मई भाग केर अपने कम्रे मई छीप गई और दरवाजा
भिड़ा लीया, लेकिन वो कब मानने वालेय थे जबरदस्ती दरवाजा ठेल केर अन्दर आ गए
और मुझेय अपनी बाँहों मई दबोच लिया,

"जीजा जी, प्लेस रंग मत दालीये" मैं बोली

"अच ठीक है, मैं रंग नही डालूँगा, लेकीन तुम्हेय ऐअस तरह भाग कर छिपने की सज़ा
जरूर दूंगा"जीजा जी बोले और एक बहन से मुझेय लापता और दुसरा हाँथ मेरे ब्लौस
मे घुसेड दीया,

"जीजा जी मुझेय छोरिये"मैं सीस्कारी लेकर बोली,

"पह्लेय तुम्हेय ठीक से सजा तों दे दूँ"वय बोलेय और मेरी चूचियों को बरी
बेदर्दी से मसलने लगे,

"जीजा जी प्लेस चोर दीजिए कोई देख लेगा"मैं कराहतेय हुवे बोली,

"उस्सय क्या फर्क परता है, ऐअस घर नं कीसी की हीमत नही जो मेरे आगे बोलेय",
वय हंस केर बोलेय और फीर उन्होने मेरी एक चूची को बुरी तरह नीचोरा की मैं चीख
परी,

"जीजा जी मैं आप्केय हाँथ जोर्ती हूँ मुझेय जाने दीजिए" मैं प्रार्थना भरे
शावर मैं बोली,

"हाँथ जोर्नेय की जरुरत नही, पह्लेय एक वादा करो तों जाने दूंगा"जीजा जी
बोलेय,

"कैसा वादा"मैने पुछा

"रात को छत वालेय कम्रे मैं आओगी, वादा करो"वय बोलेय

"ऐसा कैसे हो सकता है, अगर कीसी ने देख लिया तों"मैने कहा,

"उसकी चिंता मत करो, अगर कोई जाग गया तों मैं बहाना बना दूंगा मेरी तबियत
खराब थी और मैने दवा लेकर बुलाया था, "

जीजा जी बोले जल्दी से वादा करो, ये कह्तेय समय जीजा जी मेरे दोनो निप्लों को
अपने दोनों हन्थों की उंगलीयों से ऐअस तरह मसल रहेय थे की मेरी जान हलाक मैं
आ गई थी, एअस्सय बचाने का एक ही उपाय था और वह यह की मैं उनकी बात मान लूँ,
आख़िर मजबूर होकर वही करना परा,

"वैरी गूढ़, ये सब लोग खाना खा केर जल्दी सो जतेय हैं, मैं रात १० बजेय
तुम्हरा ईंतजार करुंगा"वो चूची मसल्तेय हुवे बोलेय, मैने सीर हिला दिया और
चुपचाप कम्रे से बाहर नीकल गई,

रात मैं १० बजेय के बाद जब सब लोग सो गए मैं दबेय पों उस कम्रे मैं पहुंच गई
जिस्मय मेरे नंदोई तीकेय थे, वो मेरा ही इंतजार केर रहेय थे, जैसेय ही मैं
कम्रे मैं पहुंची उन्होने दरवाजा बंद केर दीया और लैग्त भी बंद केर दीं,
मुझेय ऐअस समय आजीब सी सीह्रण हो रही थी, जो की अश्वाभावीक नही था मैं समझाती
हूँ की कोई भी औरत जब कीसी पराय मर्द के पास जाती होगी तों उस्केय जिस्म मैं
ऐअस तरह की सीह्रण जरूर होती होगी, कमरा बंद करेय के बाद जीजा जी ने बिना समय
गंवाएय अपने और मेरे सारे कप्रे उतार दिए, आप जान्तेय हैं की मैं कितनी
बे-शरम औरत हूँ फि भी मुझेय थोरी शर्म आ रही थी, एअस्का कारण जीजा जी के
सामने नंगा हनी का पहला अवाशार था, चुंकि कम्रे मे धुप अँधेरा था ऐअस लीये
अपने नंगेय्पन को लेकर मुझेय ज्यादा परेशानी हाही हुई, मेरी परेशानी तों
दर-अशल उस समय सुरु हुई जब जीजा जी ने मेरे अंगों को सहलाना और दबाना सुरु
कीया, उनकी हरकत इतनी मादक थी की मैं अपने आप को भूल गई और उन्सेय कास केर
लीपत गई, मेरे गलेय से सीत्कारें फूटने लगी थी, मैं दोनो हन्थों से जीजा के
पुरेय बदन पेर चीकोतीयां काट रही थी, मुझेय अपने हट्टे कठेय बदन वालेय नंदोई
से लीपत कर कुछ अलग ही प्रकार का अनंद मिल रहा था, जीजा जी के पुरेय बदन पेर
बाल ही बाल थे और उनका खुदुरा बदन मेरे चीकने बदन मैं उत्तेजना की लहर पैदा
केर रहा था,

अचानक जीजा जी ने मेरा हाँथ पक्रा और अपनी जांघों के बाच रख दिया, ऐसा कर्तेय
ही उनका मोटा लुंड मेरी मुठी मैं आ गया, मैं कांप उठी उन्केय लुंड की मोटाई
और मजबूती देख केर, "एअसेय कह्तेय हैं असली मर्द का लंड", मैं मन ही मन सोचने
लगी, दर-असल मेरे पति का लुंड एकदम मरीयल सा है, सुहागरात वालेय दीं जब मैने
जब उनका लंड पहली बार देखा तों मुझेय काफी नीराशा हुई थी, अपने पति का पतला
लंड देख केर मेरा मन बुझ सा गया, पेर आज अपने नंदोई के तागरे लंड को सामने
देख केर मेरे बुझेय दील मे एक नै रौशनी झिलमिला उठी, मेरे सोये अरमान जाग
उठेय, मैं उस चंन की बेतावी से प्रतिचा करने लगी जब जीजा जी अपने लंड को मेरी
चूत के भीतर प्रवेश करायेगेय,

जीजा जी बार बार मेरी चूत के आस पास हाँथ लगा रहेय थे, शायद वय चूत की स्थीती
का जायजा लेने की फिराक मैं थे, क्योंकि अंधेरे के कारण आंखों से कुछ देख
पाना सम्बव नही था, मेरी चूत का ठीक से अंदाज़ लगा लेने के बाद जीजा जी ने
अपने लंड का सुपारा चूत के द्वार पेर टीका दीया, ऐअस समय तक मेरी उत्तेजना
हिमालय की ऊंचाई पेर पहुच चुकी थी, जीजा जी ने जब अपना लंड मेरी चूत पेर रखा
और कुछ देर के लीये रुकेय उसी वक़्त मैने अपनी क़मर को ऐसा झटका दीया की
स्टील रोड सरीखा वह मोटा लंड मेरी चूत की मांसलता मैं धंस गया,

"शाबास"जीजा जी ख़ुशी से उछाल परे, "तुम तों ऐअस खेल की अच्ही खिलारी लगती
हो"उनकी बात सुन केर मैं शर्मा गई उन्केय सीने मे सीर चीपा केर लेट गई, फीर
तों जीजा जी ने मोर्चा संभाल लिया, अपने दोनो हंथो से उन्होने मेरी चूची को
दबोचा और अपनी क़मर चलाने लगे, मैं भी धीरेय धीरेय गांड उचाल्नेय लगी, अपनी
चूची मैं ने जीजा जी के मुह से लगा दीया था और जेअस तरह से वय उसेय चूस रहेय
थे उस्सेय मुझेय जबर्दस्त उत्तेजना हो रही थी, मिउत्तेजना मे पागल होकर
बारबरा रही थी "आआह्छ...जीजा जी......अब आग बुरी तरह भारक चुकी है, अपने लंड
को पुरा अन्दर घुसेर दो आआअह्ह्ह्ह्ह्.. ..और जोर से ह्ह्ह्ह्हान् बूऊउस्स्स्
ऐस्स्स्स्शी... जज...ओ..र जज....ओ....र से पेलीई..येई आआआआह् मुझ्सेय रुका
नही जा रहा है, मेरी मंजिल आने वाली है, आआह्ह्ह्छ माईईन्न्न्
झार्न्न्न्न्न्नेय वाआली हुँ, कहीँ ऐसा ना हो की आप प्यासेय रह जाएँ, "जब
अपनी हालत मैने उन्हे बताई तों वय मेरी गांड मसल्तेय हुवे बोलेय"फिक्र मत करो
रानी हम दोनो एक साथ ही स्टेशन पेर पहुंचे गय"एतना कह केर उन्होने अपने लंड
सय ४ ५ जोरदार झात्केय मेरी चूत पेर मारेय और एअस्केय साथ हे उन्केय लंड सय
फुहार छुट परी ठीक उसी समय मेरी चूत भी ज्व्लामुखी की तरह लावा उगलने लगी,
झरने का ऐसा जबर्दस्त अनंद पह्लेय कभी नही मिला था, शायद यह मेरे नंदोई के
मोटे और मजबूत लंड का ही कमाल था, जिसकी मदद से उन्होने मेरी चूत को बुरी तरह
मैथ डाला था और मुझेय सुख की असीम ऊँचाइयों पेर पहुंचा दीया था,

"खुल केर बताओ तुम्हेय मज़ा आया या नही"जीजा जी मुझ्सेय चीपक्तेय हुवे बोलेय,
लेकीन मैं ऐअस बात का क्या जवाब देती, सचाई तों यह थी की पहली बार मुझेय
सेक्स का अनंद मिला था, लेकीन अपने नंदोई से अपने मुह से कैसे कहती की उन्सेत
चोद्वानेय मैं पति से ज्यादा मज़ा आया था,

शायद जीजा जी मेरी ऐअस स्थीत्य(पोसिशन) को समझ गए, वय कुछ देर के बाद
बोलेय"मैं जानता हूँ तुम अपने मुह से हाँ या ना नही कह पोगी , ऐसा करो
तम्हारा जवाब ना है तों मेरे सीने पेर एक चीकोती लय लो और अगर तुम्हरा जवाब
हाँ है तों मेरे लंड को एक बार अपने होंठों से चूम लो"

जीजा जी के ऐअस सुझाव से मेरा काम आसान हो गया, मैं उठी और उनकी क़मर पेर झुक
केर उन्केय लंड को चूमने लगी,

"साबाश"उन्होंने खींच केर मुझ्र्य अपने सीने से लगा लिया और बोलेय"मुझेय भी
आज कई सालों बाद चुदाई मे ऐसा अनंद हासिल हुआ है, तुम्हारा जिस्म लाजवाब है
खास केर त्महाई गांड.चूची और जान्घेय लाजवाब हैं"

अपने नंदोई से अपनी तारीफ़ सुन केर मैं गदगद हो गई, कप्रेय पहन केर मैं नीचेय
आई, सब को सोता देख मुझेय तसल्ली हुई, मैं चुचाप जाकर अपने पति के बगल मैं सो
गई,

दो दीं बाद मेरे ननद और नंदोई देल्ही वापस चले गए, मैं अपने रोज मर्रा की
जिंदगी मे मगन हो गई, लेकीन करीब एक महीने के बाद मेरे नंदोई का मेरे पति को
पास फ़ोन कर्केय बताया की मेरी ननद की तबीयत बहुत खराब है, और दर.ने उनका
ऑपरेशन बताया है, उन्होने मुझेय कुछ दीं के लीए देल्ही पहुंचाने का अनुराध
किया था, शाम को मेरे पति ने आकर मुझेय बताया और हमने यही निर्णय लिया की
मेरे पति मुझेय देल्ही पहुचा आयें, ताकि जब तक दीदी पुरी तरह ठीक ना हो जाये
जीजा जी को खाने पीने मे कीसी तरह की परेशानी ना आये,

अग्लेय ही दीं मेरे पति ने मुझेय अपनी बहन के घर पहुचा दीया और वापस लॉट आये,
जीजा जी की आंखों मे मुझेय देख केर जो चमक उभरी थी उसका मतलब मैं फौरन समझ गई
थी, मेरी ननद अस्पताल मे भारती थी, पंच(५)दीं के बाद उनका ऑपरेशन होना था, और
उस्केय एक हफ्तेय बाद उन्हे चुती मिलनी थी, ऐअस बारह (१२)दीनों की अवधी मैं
जीजा जी की साड़ी गरमी और सारा जोश मुझेय ही झ्ल्नी थी, शाम की ट्रेन से मेरे
पति वापस चले गए, जीजा जी दीदी का खाना लेकर हॉस्पिटल चले गए, वो रात के ९
बजे वापस आये, हम दोनो ने साथ साथ खाना खाया,

"तुम सफ़र मैं थक गई होगी जा केर बेडरूम मे आराम केर लो", खाने के बाद जीजा जी
बोलेय,

"आप कहाँ सोएय्न्गेय्, जीजा जी"मैने पुछा,

"चेंता मत करो मैं भी तुम्ह्रेय पास सौन्गा और तुम्हेय चुदाई का भी भरपूर
अनंद दूंगा, लेकीन अभी मुझेय ऑफिस का थोरा काम सल्ताना है, "जीजा जी खाश
अंदाज़ मैं मुस्करा केर बोलेय, उन्केय जवाब ने मुझेय लाजवाब केर दीया था,

मैं जाकर बेडरूम मे लेट गई, थकी हनी के कारण जल्दी नींद आ गई, लेकीन कुछ ही
देर बाद मेरी आंख खुल गई, यह देख केर की मेरे नंदोई पुरी तरह नंगी हालत मे
मेरे पास बैठेय थे, उनोहोनेय ना जाने कब मेरे कप्रेय भी उतार दीये थे, ऐअस
वक़्त वय बरेय धयान से मेरी चूत को नीहार रहय थे,

जैसे ही उन्होने मुझेय आन्खेय खोल्तेय हुवे देखा, उन्होने मेरी चूत सह्लातेय
हुवे बोला"अछा हुआ तुम जाग गई, चुदाई का मजा तभी आता है जब दोनो पर्त्नेर होश
मे और जोश मे होन"

"जीजा जी पह्लेय लाइट ऑफ़ केर दीजेये" मैने अपनी जन्घेय मोर केर अपनी चूत
छुपतेय हुवे कहा,

"नही आज तों लाइट जलती ही रहेगी, उस रात तुम्हारी ससुराल मे मैनेय्तुम्ह्रेय
बदन को सिरफ chhoo ker महसूस किया था मगर आज मैं तुम्हारी खुबसुरती अपनी आंखो
से देखना चाहता हूँ"जीजा जी ने कहा,

"लेकीन मुझेय शर्म आ रही है"मैने कहा,

"यह शर्म तों कुछ देर की है, अभी कुछ देर मैं तुम्हेय जैसेय ही गरमी छाधेगी
वैसे ही ये शरम मुह ह्हुपा केर भाग जायेगी, मेरी एक बात याद रखो चुदाई का
पुरा मज़ा तभी लिया जा सकता है जब ईंसान शर्म का चोला उतार फेंकेय और पुरा
बेसर्म बन जाये"जीजा जी ने कहा,

"मैं ऐसा नही केर सकती" मैं बोली,

"ऐसा मत कहो, मेरे पास ऎसी तरकीब है जीस्सय दो मीनत मे तुम्हारी शर्म भाग
जायेगी, ज़रा अपनी जान्घेय तों फैलाओ"जीजा जी बोलेय,

मैने उन्केय कहने से जान्घेय खोल दीं, लेकीन शरम से मेरी आँखें अपने आप मुंद
गई,

अग्लेय ही पल अपनी चूत पेर किसी खुरदुरी वास्तु का स्पर्श पा केर मैं चौंक
परी, आन्खेय खोली तों देखा की जीजा जी ने मेरी जाँघों के बीचों बीच अपना मुह
लगा रखा है और उनकी सख्त मुन्चेय मेरी चूत की मुलायम त्वचा से रगर खा रही है,

"हाय जीजा जी ये आप क्या केर रहें है"मेरे मुह से बदहवासी मे नीकला,

"प्यार"जीजा जी एक पल को चेहरा उपर उठा केर मुस्करा केय बोलेय और फीर झुक केर
मेरी चूत को जीव से चाटने लगे,

उन्केय ऐसा कर्तेय ही मेरे बदन मे एक अजीब सी लहर उठाने लगी, ऐसा लगने लगा
जैसेय मेरी चूत मोटी होती जा रही है, तभी जीजा जी मेरी चूत की फंकों को अपने
होंठों के बीच रख केर चूसने लगे,

अब तों मैं बुरी तरह तरप उठी, मेरी चूत ऐअस तरह कूल्बुल्ला उठी की जैसेय मैं
झाद्नेय वाली होऊं, मैने जीजा जी का चेहरा अपने दोनो हन्थों से पकड़ केर अपनी
चूत से पुरी तरह सत्ता दीया और अपनी गांड हीला हीला केर अपनी चूत उन्केय
पूरेय चेहरेय पेर राग्द्नेय लगी,

जीजा जी को शायद चूत चूसने का काफी अछा अनुभव था, वो बार बार चूत को चूम रहेय
थाय और कभी उसेय दंतों से काट लेतेय कभी उंगलीयों से मसल देते, उनकी जीव लूप
लूप करती हुई कई बार मेरी चूत के उपर घूम चुकी थी और उसकी लार से मेरी पुरी
चूत गीली हो गई थी और मुझेय लंड की जबर्दुस्त तलब महसूस हो रही थी, मन हो रहा
था की जीजा जी का लंड पाकर केर अपनी चूत मे खुद ही घूसेद लूँ और तब फीर टाबर
तोर उछाल कूद करूं जीस्सय की मेरी जलती चूत को ठंडक मील जाये,

अभी मैं ये सोच ही रही थी की तभी जीजा जी ने अचानक अपनी जीव मेरी चूत मे सरका
दीं, और उसेय जल्दी जल्दी चलाने लगे, मैं पुरी तरह उत्तेजना मैं तों थी ही,
जीव की रगर लग्तेय ही मेरी चूत खुल केर फफक परी, मैं सीस्कारी लेकर अपने
नंदोई से लीपत परी,

जीजा जी ने मुझेय अपनी बाँहों मैं भर लीया और मेरे गालों को चूमने लगे, थोरी
देर बाद मेरी गांड मसल्तेय हुवे बोलेय

"ऐसा मज़ा तुमहरेय पति ने कभी तुम्हेय दीया?सच सच बताना"

"नहीं कभी नहीं"मुझेय कहना परा,

"मैने तुम्हारी आग तों शांत केर दीं , अब तुम मेरी प्याश बुझाओ"वय अपना लंड
मेरी जाँघों पेर रागार्तेय हुवे बोलेय, मैं समझी अब वो मुझेय चोदना चाह्तेय
हैं ईस लीए मैने हन्थों से उनका लंड पाकर केर अपनी चूत मैं घ्हुसेर लिया,

"ये क्या केर रही हो"जीजा जी ने अपना लंड तुरन्त बाहेर नीकाल लीया और बोलेय
"मैने तुम्हेय होंठों से मज़ा दीया है तुम भी मेरेय लंड को होंठों से प्यार
करो"अब मैं समझ गई जीजा जी मुझ्सेय लंड चुस्वाना चाह्तेय हैं, चुंकी उन्होने
मेरी चूत चाट केर मेरी प्याश बुझा चुकेय थे एअस्लीये मैं भी उनकी एअचा पुरी
करने को विवश थी, मैने झुक केर जीजा जी का लंड मुह मे दाल लीया और उसेय चूसने
लगी,

जीजा जी ने मेरे सीर को दोनो हन्थों से थाम लीया और अपनी क़मर आगे पीचेय करने
लगे, एअस्केय साथ हे उनका लंड मेरे मुह मे अन्दर बाहर हनी लगा, कुछ हे देर
हुई होगी की अचानक जीजा जी का पुरा बदन जोर से हील्नेय लगा , जब तक मैं कुछ
समझ पाती तब तक उन्केय लंड ने ढ़ेर सारा सफ़ेद लावा मेरे चेहरेय पेर उगल दीया,
मैने उठ केर जीजा जी का लंड और अपना मुह साफ किया और उसी हाल मैं सो गेय, रात
मैं जीजा जी ने मेरी चूत और गांड का मज़ा लीया, मैने भी उनका पुरा साथ दीया,
मैने गांड पलेय कभी नही मर्वाई थी ऐअस लीए सुरु मे लंड घुस्तेय समय मुझेय
काफी दर्द का सामना करना परा, उन्होने थूक लगा केर गांड मारी थी, बाद मे
रास्ता खुल जाने से मुझेय बहुत मज़ा आया, हमलोग सुबह ९ बजे उठेय, जीजा जी को
दीदी का नास्ता लेकर हॉस्पिटल जाना था, लेकीन उठने से पह्लेय उन्होने मुझेय
चोदा फीर हॉस्पिटल गए, होपितल से लौटाने के बाद वो फीर से मुझ पेर चा गए,
हालांकि मुझेय भी उन्केय साथ चुदानेय का भरपूर अनंद मील रहा था ऐअस लीये मैने
भी ईंकार नही कीया और खुल केर उन्केय अल्बेलेय मस्ताने लंड का मज़ा लिया,
जीतने दीं मैं देल्ही मे रही जीजा जी के साथ मैने जम कर जवानी का मज़ा लिया,
लेकिल ननद के ठीक होकर घर आने के बाद मुजेय अपनी ससुराल वापस आना परा, उस्केय
बाद से मैं अपने पति के साथ ही रह रही हूँ, लेकीन जिस तरह एक बार चटपटा स्वाद
जुबान को जग जाने के बाद इंसान को सादा खाना पसंद नही आता ठीक उसी प्रकार
अपने नंदोई के साथ खुल कर सेक्स कर लेने के बाद मुझेय अपने पति के सीधेय सरल
प्यार मे मुझेय मज़ा नही अता है, हर वक़्त मुजेय अपने नंदोई याद आतेय हैं, खास
कर जेअस समय मेरे पति चुदाई कर्तेय हैं उस वक़्त मैं नंदोई जी के साथ बीताये
सुखद पलों की याद मैं खो जाती हूँ,

अब मैं अपनी ससुराल मैं कोई नंदोई जैसा चुदाकेर खोज रही हूँ जो मेरी और मेरी
चूत की अची तरह सफाई कर सकेय....


Share/Bookmark

Enter your address Here